
नवी मुंबई: चलती ट्रेन में मोटरमैन हुआ बेहोश, बड़ा हादसा टला
Navi Mumbai: Motorman faints on a moving train, major accident averted
नवी मुंबई/प्रतिनिधि: देश की जीवनरेखा मानी जाने वाली मुंबई लोकल ट्रेन में एक ऐसी घटना घटी, जिसने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि जब ड्यूटी पर निष्ठा और साहस का संगम होता है, तो संभावित त्रासदी भी टल सकती है। नवी मुंबई की ओर जा रही एक धावती लोकल ट्रेन में मोटरमैन की अचानक तबीयत बिगड़ गई, लेकिन अपने कर्तव्य के प्रति सजगता और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसने जो निर्णय लिया, वह ना सिर्फ सराहनीय है, बल्कि प्रेरणादायी भी है।
मिली जानकारी के अनुसार, लोकल ट्रेन जब धावती अवस्था में थी, उस दौरान मोटरमैन को अचानक चक्कर आने लगे और तबीयत अत्यंत खराब महसूस होने लगी। कमजोरी, श्वास घ्यायला त्रास आणि डोळ्यांपुढे अंधारी येऊ लागली होती. अशा अवस्थेतसुद्धा त्याने आपले मानसिक संतुलन ठेवले आणि संपूर्ण लोकलच्या नियंत्रणाची जबाबदारी स्वीकारत ती सुरक्षितपणे बेलापूर स्थानकावर आणून थांबवली.
ट्रेन के बेलापुर स्टेशन पर रुकते ही अन्य रेलवे स्टाफ और मौजूद कर्मियों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मोटरमैन को तात्कालिक रूप से पास के एमजीएम रुग्णालयात (अस्पताल) दाखिल करवाया। डॉक्टरों के अनुसार, मोटरमैन को अत्यधिक शारीरिक थकावट और ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट के चलते ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उन पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।
इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद रेलवे विभाग, प्रशासन और आम नागरिकों द्वारा मोटरमैन की इस समयसूचक, धैर्यपूर्ण और साहसी कार्रवाई की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। एक ऐसे समय में, जब उनकी स्वयं की जान पर बन आई थी, तब भी उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा और ट्रेन को नियंत्रित ढंग से सुरक्षित स्टेशन तक पहुंचाया।
यदि मोटरमैन ने उस समय होश ना खोया होता या ट्रेन को समय रहते नियंत्रित ना किया होता, तो सैकड़ों यात्रियों की जान को खतरा हो सकता था। मुंबई जैसे महानगर की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोकल ट्रेनें हर दिन लाखों लोगों की जीवनरेखा होती हैं। ऐसे में एक ट्रेन का नियंत्रण बिगड़ना संभावित रूप से एक बड़ी दुर्घटना में बदल सकता था। परंतु मोटरमैन की सजगता और तत्परता ने वह अनर्थ होने से टाल दिया।
रेलवे मंत्रालय ने भी इस मोटरमैन की बहादुरी का संज्ञान लिया है और संभावना है कि उन्हें विशेष सम्मान से नवाजा जाएगा। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि रेलवे कर्मचारियों की ड्यूटी सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, निष्ठा और सेवा भावना का प्रतीक है।
यह हादसा नहीं, एक ‘हादसे से बचाव’ की कहानी है। मोटरमैन की सजगता ने मुंबई लोकल जैसे विशाल और व्यस्त तंत्र को किसी बड़ी दुर्घटना से बचा लिया। यह घटना सभी को यह सोचने पर मजबूर करती है कि रेलवे कर्मचारियों की भूमिका कितनी संवेदनशील और महत्वपूर्ण होती है।
इस घटना में भले ही कोई हानि नहीं हुई, लेकिन इससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। यह एक चेतावनी भी है कि कर्मचारियों की सेहत और तनाव का स्तर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। रेलवे प्रशासन को अब ऐसे कर्मचारियों के लिए रेगुलर हेल्थ चेकअप, रेस्ट पीरियड और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से और भी बेहतर तरीके से निपटा जा सके।



