मराठा और ओबीसी – दोनों समाज के हितों की होगी रक्षा : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
"सिर्फ एक फैसला बताएं जो मराठा समाज के हित में आपने अढ़ाई साल में लिया हो" – मुख्यमंत्री की चुनौती
मुंबई/प्रतिनिधी: शासन मराठा और ओबीसी दोनों समाजों के हितों का विचार करेगा और किसी पर भी अन्याय नहीं होने देगा। लेकिन मराठा समाज के कंधे पर बंदूक रखकर अपना फायदा उठाने वाले राजनीतिक दलों को उनकी सरकार में लिए गए किसी एक निर्णय को दिखाना चाहिए, ऐसी प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार, 28 अगस्त को दी। मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “मराठा और ओबीसी दोनों समाजों से मेरी विनती है कि शासन दोनों समाजों के हितों का ध्यान रखेगा। किसी भी समाज को दूसरे समाज के सामने लाने का शासन का उद्देश्य नहीं है। इसलिए किसी पर अन्याय करके किसी को देना हमारा प्रश्न नहीं है, हम दोनों समाजों की समस्याएं हल करेंगे। ओबीसी समाज के साथ हम अन्याय नहीं होने देंगे, यह उन्हें ध्यान में रखना चाहिए। साथ ही मराठा समाज के प्रश्न भी हमारी सरकार के अलावा किसी और ने नहीं सुलझाए। हमारी सरकार के दौरान ही उनके प्रश्न हल हुए हैं। इसलिए आगे भी हम ही उनके प्रश्नों को हल करेंगे।”
आंदोलन लोकतंत्र की सीमा से बाहर न जाएं
“लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने और आंदोलन करने का अधिकार है। लोकतांत्रिक तरीके से हो रहे आंदोलन को हम नहीं रोकेंगे। हम उसका सामना करेंगे, आवश्यक चर्चा करेंगे और लोकतंत्र की सीमा के भीतर उसका समाधान करेंगे। लेकिन कोई भी आंदोलन लोकतंत्र की सीमाओं से बाहर नहीं जाना चाहिए, यही मेरी इच्छा है। यहाँ उच्च न्यायालय ने सीमा निर्धारित की है, इसलिए वह सीमा हमारे हाथ में नहीं है। उच्च न्यायालय के नियमों के अनुसार यदि आंदोलन होगा तो हमें कोई परेशानी नहीं। हमने मराठा समाज को आरक्षण दिया है। उन्हें ओबीसी से आरक्षण चाहिए। लेकिन ओबीसी में करीब 350 जातियाँ हैं। मेडिकल प्रवेश में ओबीसी का कट ऑफ एसीबीसी से ऊपर है और एसीबीसी का कट ऑफ ईडब्ल्यूएस से ऊपर है। इसलिए इस मांग से कितना लाभ होगा, इसकी कल्पना नहीं है। मराठा समाज को तो 10% अलग आरक्षण दिया गया है। फिर भी हम सबकी बात सुनेंगे,” उन्होंने आगे कहा, “अगर सही आंकड़ों को देखा जाए तो मराठा समाज के हित में क्या है, यह समझ में आएगा। लेकिन मराठा समाज के नेताओं को समाज के हित का ध्यान रखते हुए मांग करनी चाहिए, यह उनकी जिम्मेदारी है। अगर यह सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की लड़ाई है तो कुछ विचारकों को मांग का सही तरीके से विचार करना चाहिए।”
मराठा समाज के हित में एक निर्णय दिखाओ
मराठा आरक्षण आंदोलन को राजनीतिक मोड़ मिला है या नहीं, इस सवाल पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “पहले क्या हुआ यह सबने देखा है। आज भी आंदोलन के लिए संसाधन कौन जुटा रहा है, यह हम देख सकते हैं। लेकिन हमारे लिए यह आंदोलन राजनीतिक नहीं है, हम इसे सामाजिक दृष्टिकोण से देखते हैं। कुछ राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए मराठा समाज के कंधे पर बंदूक रखकर फायदा उठाना चाहते हैं, लेकिन उनका नुकसान होगा। मराठा समाज के लिए सारे निर्णय मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए और एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री रहते हुए लिए हैं। अण्णासाहेब पाटील आर्थिक विकास मंडल 15 साल क्यों बंद पड़ा था? 15 साल तक किसका शासन था? मैंने वह मंडल खड़ा किया और आज डेढ़ लाख उद्यमी तैयार किए हैं। सारथी के माध्यम से आईएएस, आईपीएस अधिकारी बन रहे हैं। शिक्षा, छात्रावास, भत्ते ये सारी योजनाएं हमने लागू की हैं। इसलिए अब जो लोग आवाज उठाते हैं, उन्हें एक बार आईना देखना चाहिए और बताना चाहिए कि हमने क्या किया। अढ़ाई सालों में मराठा समाज के हित में लिए गए एक भी निर्णय को दिखाएं,” मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा।
विरार में दुर्घटना में मृतकों के वारिसों को 5 लाख रुपये की मदद
“विरार पश्चिम में एक दुखद घटना हुई है। एक इमारत गिरने से करीब 17 लोगों की मौत हुई है। एनडीआरएफ को घटनास्थल पर भेजा गया था। सभी तरह की तकनीक का उपयोग कर उनके माध्यम से सारी कार्रवाई शुरू है। इस इमारत को मई महीने में स्ट्रक्चरल ऑडिट की नोटिस दी गई थी, लेकिन लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और इसी वजह से यह दुर्घटना हुई लगती है। लेकिन लोगों के भी कई प्रश्न होते हैं, इसलिए उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता। यह घटना गंभीर है और हमने मृतकों के वारिसों को पांच लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की है। 15-20 साल पुरानी कई इमारतें हैं। ऐसी सभी इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट करने की महापालिका को सूचनाएं दी गई हैं। हम वसई-विरार क्षेत्र में कड़ी भूमिका निभा रहे हैं। ईडी द्वारा की गई कार्रवाई सबके सामने है। पहले इस शहर को खत्म करने का काम हुआ था। वहाँ की आधारभूत सुविधाएं, भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं इस शहर को ग्रसित कर रही थीं। हम उसे बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं,” मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा।




