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Indrayani Bridge Accident: पुल टूटने से 2 पर्यटकों की मौत, 18 घायल

Indrayani Bridge Accident: 2 tourists died, 18 injured due to bridge collapse

पुणे /प्रतिनिधी : पुणे जिले के मावळ तालुका स्थित कुंडमळा गांव में रविवार दोपहर एक बड़ा हादसा हुआ। इंद्रायणी नदी पर बना लोहे का पुल अचानक ढह गया, जिससे वहां मौजूद करीब 100 पर्यटक खतरे में पड़ गए। इस दर्दनाक हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 लोग घायल हो गए हैं। राहत की बात यह है कि 38 लोगों को समय रहते बचा लिया गया। रविवार दोपहर करीब 3:30 बजे यह हादसा उस समय हुआ जब बड़ी संख्या में पर्यटक वर्षा-विहार (मानसून पर्यटन) के लिए कुंडमळा पहुंचे थे। इंद्रायणी नदी पर बना यह लोहे का पुल गांवों को जोड़ता है और पर्यटकों के लिए भी मुख्य मार्ग है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, पुल काफी पुराना और जीर्ण स्थिति में था। रविवार को बड़ी संख्या में पर्यटक और उनके वाहन इस पुल पर चढ़ गए थे, जिससे पुल पर भार अधिक हो गया और वह अचानक भरभराकर गिर पड़ा। आपदा निवारण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस हादसे में दो लोगों की मौत हुई है। घायलों की संख्या 18 बताई गई है, जिनमें से कई की हालत गंभीर है। सभी घायलों को एम्बुलेंस के जरिए सोमाटणे फाटा स्थित पवना हॉस्पिटल, मायमर हॉस्पिटल, अथर्व हॉस्पिटल समेत अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मृतकों की पहचान की जा रही है। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की दो टीमों, “आपदा मित्र”, पुणे और पिंपरी चिंचवड की फायर ब्रिगेड और अन्य स्वयंसेवी संस्थाएं मौके पर पहुंच गईं और युद्ध स्तर पर बचाव कार्य शुरू कर दिया। अभी भी पुल के टूटे हिस्से के नीचे नदी में तीन लोगों के फंसे होने की आशंका है। भारी बारिश और तेज जल प्रवाह के कारण बचाव कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह दुर्घटना अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। प्राथमिक जानकारी में यह स्पष्ट हुआ है कि पुल जीर्ण स्थिति में था। उन्होंने प्रशासन को इस हादसे की संपूर्ण जांच के निर्देश दिए हैं और कहा है कि अगर पुल की देखरेख में किसी भी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार सभी घायलों को आवश्यक और निशुल्क चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवा रही है। साथ ही उन्होंने आम नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल सरकारी एजेंसियों द्वारा दी गई अधिकृत जानकारी पर ही विश्वास रखने की अपील की है। घटनास्थल पर मावळ क्षेत्र के विधायक सुनील शेळके और पूर्व विधायक संजय भेगडे भी पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ितों और उनके परिजनों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल वर्षों से जीर्ण अवस्था में था और इसकी मरम्मत की मांग बार-बार की गई थी, लेकिन प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अगर समय रहते पुल की जांच और मरम्मत की गई होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। राज्य सरकार ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। पुल के निर्माण, रखरखाव और उसकी सुरक्षा संबंधी पहलुओं की गहन समीक्षा की जाएगी। हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों को मुआवजा देने की भी घोषणा जल्द की जा सकती है। यह हादसा एक बार फिर देश में ढांचागत संरचनाओं की जर्जर स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करता है। समय रहते मरम्मत और निगरानी न होने के चलते ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाती हैं, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अब देखना यह है कि इस हादसे से प्रशासन क्या सबक लेता है।

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