Train Accident : लोकल ट्रेनों में भीड़ और जानलेवा हादसे, कब सुधरेगी उपनगरीय रेलवे?
Train Accident: Crowds in local trains and fatal accidents, when will the suburban railway improve?
ठाणे/सुमित गायकवाड : मुंबई और ठाणे जिले के उपनगरीय रेलवे यात्रियों की लगातार बढ़ती समस्याओं को देखते हुए एक महत्वपूर्ण गोलमेज सम्मेलन का आयोजन कोकण पदवीधर मतदार संघ के विधायक निरंजन डावखरे की अध्यक्षता में किया गया। यह सम्मेलन शनिवार, 14 जून को ठाणे में संपन्न हुआ, जिसमें रेलवे यात्रा से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधान पर गहन चर्चा की गई। इस बैठक में ठाणे विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय केळकर, भाजपा शहराध्यक्ष संदीप लेले, वरिष्ठ समाजसेवक मनोहर डुंबरे, ठाणे रेलवे प्रवासी संघटना के अध्यक्ष नंदकुमार देशमुख, सचिव सुधाकर पतंगराव, उपनगरीय प्रवासी महासंघ की अध्यक्ष लता अरगडे, पूर्व अध्यक्ष मनोहर शेलार, मुंबई महासंघ के मधु कोटियन, दिवा रेलवे प्रवासी संस्था के आदेश भगत, कल्याण कसारा संस्था के अध्यक्ष राजेश घनगाव, वंदना सोनावणे और संजय मिस्त्री सहित अनेक प्रमुख पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बनी चर्चा का केंद्र
सम्मेलन में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि मुंब्रा-दिवा रेलखंड पर हाल ही में हुई दुर्घटनाओं में पाँच यात्रियों की मृत्यु हो चुकी है। इसी तरह, उपनगरीय रेलों में अत्यधिक भीड़ के चलते प्रतिदिन 7-8 यात्रियों की जान जा रही है। इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन पर त्वरित और ठोस कार्यवाही करने का दबाव बनाया गया।
प्रमुख सुझाव और माँगे:
- ठाणे-कर्जत-कसारा शटल सेवा जल्द शुरू की जाए ताकि यात्रियों को वैकल्पिक सुविधा मिल सके।
- लोकल ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी बढ़ाई जाए जिससे भीड़ का बोझ कम हो।
- सभी लोकल ट्रेनें 15 डब्बों की की जाएं ताकि अधिक यात्रियों को बैठने और खड़े होने की जगह मिले।
- महिलाओं की सुरक्षा के लिए हर स्टेशन पर GRP और रेलवे पुलिस की तैनाती अनिवार्य की जाए।
- एसी लोकल ट्रेनों के किराए सामान्य लोकल दर पर ही रखे जाएं ताकि अधिक से अधिक लोग इसका उपयोग कर सकें।
- कार्यालयों और कंपनियों के समय में लचीलापन लाने का सुझाव दिया गया, जिससे पिक ऑवर की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
नियमित संवाद और मांगों का मंत्रालय तक संप्रेषण
विधायक निरंजन डावखरे ने यह स्पष्ट किया कि इस तरह की गोलमेज परिषद हर तीन महीने में आयोजित की जाएगी ताकि यात्रियों की समस्याओं पर निरंतर ध्यान दिया जा सके और मांगों की रेल मंत्रालय तक प्रभावी पहुँच सुनिश्चित हो। मुंबई रेलवे प्रवासी महासंघ के अध्यक्ष मधु कोटियन ने बताया कि बैठक एक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई और इसमें केवल समस्याएं ही नहीं, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान भी सुझाए गए। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधाओं की गुणवत्ता, समयपालन, भीड़ प्रबंधन और मंजूर प्रोजेक्ट्स में हो रही देरी पर भी चर्चा हुई। इस सम्मेलन में तय हुआ कि यात्रियों के हित के लिए प्रवासी संघटनाएं एकजुट होकर काम करेंगी और आने वाले समय में रेलवे मंत्रालय पर निरंतर दबाव बनाया जाएगा। यह पहल निश्चित ही उपनगरीय रेलवे यात्रियों की आवाज को मजबूत मंच प्रदान करेगी और उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने में सहायक सिद्ध होगी।




