मुंबई में मराठी भाषा जरूरी नहीं: भय्याजी जोशी के बयान पर भड़के ठाकरे | जमकर बवाल

Marathi language not necessary in Mumbai: Raj and Uddhav Thackeray angry over Bhayyaji Joshi's statement

मुंबईः राष्ट्रीय स्वयं संघ नेता सुरेश भय्याजी जोशी के एक बयान पर बवाल मच गया है. कांग्रेस और ठाकरे बंधुओं ने भय्याजी जोशी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की है. आज बजट अधिवेशन के चौथे दिन सत्ता विरोधी दलों ने दादर में आंदोलन किया और भय्याजी जोशी के खिलाफ जमकर हुंकार भरी. शिवसेना उबाठा चीफ उद्धव ठाकरे, और आदित्य ठाकरे के साथ ही मनसे चीफ राज ठाकरे ने भय्याजी जोशी के खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि मराठी भाषा को कम करने और परप्रांतीयों के तुष्टीकरण के लिए भय्याजी जोशी ने ऐसा बयान दिया है. मराठी मुंबई औऱ महाराष्ट्र की भाषा है, और इसकी सख्ती होनी चाहिए, लेकिन जोशी को यह पसंद नहीं है. यह महाराष्ट्र का अपमान है इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. इस विवाद पर मिली जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

आरएसएस नेता भैयाजी जोशी के इस बयान ने महाराष्ट्र और दक्षिण-भारत में भाषा को लेकर एक बार फिर विवाद को गरमा दिया है. भैयाजी जोशी ने दावा किया था कि महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई की भाषा मराठी नहीं है, और यहां कोई भी बिना मराठी के काम कर सकता है. उनके इस बयान ने राजनीति में हलचल मचा दी है, और शिवसेना (UBT) ने इस पर तीखा विरोध जताया है.

जोशी को ऐसा बोलने का अधिकार किसने लियाःसंजय राउत

शिवसेना के सांसद संजय राउत ने नाराजगी दिखाते हुए भय्याजी जोशी से सवाल किया कि, “आप मुंबई में आकर इस तरह का बयान कैसे दे सकते हैं? क्या आपको महाराष्ट्र की संस्कृति और इतिहास का कोई सम्मान नहीं है? मुंबई, जो मराठी मानुष का गढ़ है, वहां इस तरह की बातें करना पूरी तरह से असंवैधानिक है.” संजय राउत ने यह भी पूछा कि भैयाजी जोशी को इस तरह का बयान देने का अधिकार किसने दिया?

मुंबई में रहना है तो गुजराती बोलना होगा-जितेंद्र आह्वाड

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी पवार खेमे के विधायक जितेंद्र आह्वाड ने कहा कि बीजेपी और संघ के लोग मराठी के विरोधी हैंम. वे अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए गुजराती और अन्य भाषाई लोगों को खुश करने की साजिश में रहते हैं. आह्वाड ने कहा कि मुंबई के घाटकोपर, मुलुंड, भांडुप, बोरीबली जैसे कई इलाके हैं जहां गुजराती अपनी भाषा बोलते हैं. यदि यही हालत रही तो मराठी सिर्फ दादर तक सिमट जाएंगे . एनसीपी विधायक जितेंद्र आह्वाड ने भय्याजी जोशी के बयान पर तंज कसते हुए कि धन्यवाद आपने मराठी लोगों को जगा दिया. मराठी लोगों ध्यान दो अब मुंबई में रहना है तो गुजराती बोलना होगा..

भैया जोशी का कथन सही, विरोध गलत है-करणी सेना

संविधान की आठवीं अनुसूची में संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं की सूची है। प्रारंभ में,Marathi language not necessary in Mumbai: Raj and Uddhav Thackeray angry over Bhayyaji Joshi's statement संविधान ने 14 भाषाओं को मान्यता दी, लेकिन समय के साथ इसका विस्तार हुआ। वर्तमान में हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, मराठी, उर्दू, गुजराती और पंजाबी सहित 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है। भैया जोशी इस बात से वाकिफ हैं कि देश के बड़े महानगरों में अलग-अलग भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं. गुजराती भाषा को संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसलिए महाराष्ट्र करणी सेना प्रमुख अजय सिंह सेंगर ने राय व्यक्त करते हुए कहा कि शिव सेना, कांग्रेस और ठाकरे शिवसेना द्वारा भैयाजी जोशी के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग हास्यास्पद है. हालाँकि, भाषा विवाद पैदा करना एक अपराध है।

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