
Shivsena vs Shivsena : क्या एकनाथ शिंदे, शिवसेना (UBT) को खत्म करना चाहते हैं !
Why Eknath Shinde wants to destroy Uddhav Thackeray's Shiv Sena
मुंबई : उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवेसना (उबाठा) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे लगातार शिवसेना उबाठा के सांसदों और विधायकों को तोड़कर अपनी पार्टी से जोड़ रहे हैं. ऐसे में उद्धव ठाकरे के लिए बालासाहेब ठाकरे शिवसेना को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है. बीते 13 फरवरी को कोंकण क्षेत्र के पूर्व विधायक राजन सालवी ने उद्धव को राम राम बोलते हुए एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना का दामन थाम लिया. पूर्व विधायक राजन सालवी के बाद अब भास्कर जाधव भी शिवसेना यूबीटी से नाराज होकर पार्टी छोड़ने की राह पर हैं. उनका हालिया बयान इस बात का संकेत देता है कि जल्द ही वे उद्धव से अलग हो जाएंगे. उन्होंने अपने हालिया बयान में इसका संकेत दिया था. भास्कर जाधव ने कहा था कि पार्टी उन्हें नजरअंदाज कर रही है. उन्हें पार्टी में न तो उपयुक्त पद दिया जा रहा है और न ही काम सौपे जा रहे हैं. हालांकि उन्होंने आज रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर अपने सभी बयानों पर सफाई दी. और दावा किया कि उनके बयानों का अलग अर्थ समझा गया.
राजन साल्वी के समर्थकों पर निस्कासन कार्रवाई
रत्नागिरी जिले के पूर्व विधायक राजन साल्वी ने बीती 13 फरवरी को शिवसेना (उबाठा) छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया था. इसके बाद उद्धव ठाकरे ने कार्रवाई करते हुए राजन साल्वी के नजदीकी पदाधिकारियों पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी. इसके तहत शिवसेना (यूबीटी) ने शनिवार को रत्नागिरी के सह संपर्क प्रमुख राजेंद्र महाडिक, जिला प्रमुख विलास चालके और चिपलून संगमेश्वर विधानसभा प्रमुख रोहन बने को पार्टी विरोधी गतिविधियों के के लिए निस्साकित कर दिया गया. शिवसेना ने पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी है.
शिवसेना उबाठा को बचाने और भास्कर जाधव को मनाने की जिम्मेदारी संजय राऊत को सौंपी गई है. संजय राऊत ने बयान दिया कि वह भास्कर जाधव से बात करके मामले को सुलझाने की कोशिश करेंगे. इसी बीच, मातोश्री पहुंचे रत्नागिरी के पूर्व सांसद विनायक राऊत ने उद्धव से मुलाकात की. कोंकण में विनायक राऊत की कार्य प्रणाली से ही नेताओं में अनबन की खबर है. पूर्व विधायक राजन साल्वी भी विनायक राऊत से नाराज चल रहे थे. हालांकि, उन पर अकूत संपत्ति अर्जित करने का केस भी महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो में चल रहा है. ऐसे में शिंदे गुट में जाने की एक वजह ये भी बताई जाती है. सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान विधायक भास्कर जाधव का भी विनायक राऊत से विवाद चल रहा है. इसीलिए राऊत को मातोश्री में तलब किया गया था.
शिवसेना-शिवसेना में टकराव की असली वजह क्या है !
उद्धव ठाकरे के साथ शिंदे का टकराव राजनीतिक सत्ता संघर्ष, वैचारिक मतभेद और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं में गहराई से निहित है. शिंदे का दावा करते हैं कि 2019 में कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन करके उद्धव ठाकरे शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा से दूर हो गए. शिंदे ने खुद को बालासाहेब के दृष्टिकोण के “सच्चे” उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित किया और पार्टी के मूल भाजपा समर्थक रुख को पुनः प्राप्त करने का लक्ष्य रखा. 2022 में शिवसेना में विभाजन की योजना बनाकर और भाजपा के साथ सरकार बनाकर शिंदे ने मुख्यमंत्री का पद सुरक्षित कर लिया. अगर उद्धव का गुट फिर से मजबूत होता है, तो यह शिंदे की राजनीतिक प्रासंगिकता और सरकार की स्थिरता को खतरे में डाल सकता है. शिंदे ने कानूनी लड़ाई के बाद शिवसेना के नाम और पार्टी के चिह्न पर सफलतापूर्वक दावा किया. उद्धव को कमज़ोर करने से यह सुनिश्चित होता है कि उनका गुट महाराष्ट्र की राजनीति में प्रमुख सेना बना रहेगा.कई लोगों का मानना है कि भाजपा ने महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन को तोड़ने और क्षेत्रीय विरोधियों को कमज़ोर करने के लिए शिंदे का समर्थन किया. विभाजित शिवसेना महाराष्ट्र में भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति के लिए फ़ायदेमंद है.
एकनाथ शिंदे चाहते हैं बीजेपी से दूर रहे उद्धव ठाकरे
ताजा अपडेट्स के मुताबिक उद्धव ठाकरे के सांसद और विधायक जिस तरह लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं उसके पीछे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की रणनीति बताई जा रही है. एक्सपर्ट की मानें तो बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के बीच शुरू हुए खींचतान के बीच शिंदे दोबारा महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं इसके लिए वे उद्धव ठाकरे की शिवसेना को लगातार तोड़ने और अपनी शिवसेना को मजबूत करने में जुटे हैं. उन्हें बीजेपी आलाकमान के सामने यह साबित करना है कि अब उद्धव के पास कुछ भी नहीं है और जो है वह शिवसेना सिर्फ उन्हीं के पास है. यह बवाल बीजेपी की उद्धव ठाकरे के साथ बढ़ रही नजदीकियों के बाद प्रारंभ हुआ है. राजनीतिक सुत्रों की मानें तो बीजेपी उद्धव ठाकरे को फिर साथ लाना चाहती है, और यदि ऐसा होता है तो यह एकनाथ शिंदे के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा. फिलहाल उद्धव ठाकरे आज शाम शिवसेना नेताओं की बैठक करने वाले हैं जिसमें पार्टी को बचाने और विधायकों सांसदों को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया जा सकता है. इस बैठक में कोंकण परिक्षेत्र में पार्टी नेताओं में मचे असंतोष पर चर्चा की जाएगी. राजन साल्वी सहित जिला स्तर के सैकड़ों कार्यकर्ताओं और नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद अगर भास्कर जाधव की नाराजगी दूर करने में भी उद्धव ठाकरे असफल रहे तो कोंकण में शिवसेना पूरी तरह से साफ हो जाएगी. फिलहाल भास्कर जाधव कोंकण क्षेत्र में शिवसेना (यूबीटी) के एकमात्र विधायक बचे हैं.



