
नवी मुंबई एयरपोर्ट पर प्रकल्पग्रस्तों का मोर्चा, रोजगार की मांग
Protest by project-affected people at Navi Mumbai Airport; demand for employment
नवी मुंबई: नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल पर पनवेल के प्रकल्पग्रस्त संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा निकाला। प्रदर्शनकारियों ने स्काई हाय कार्गो टर्मिनल के खिलाफ आवाज उठाते हुए स्थानीय प्रकल्पग्रस्तों के टेंपो को एंट्री देने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। आंदोलन में 27 गांवों के प्रकल्पग्रस्तों का प्रतिनिधित्व करने वाली लोकनेता दिबा पाटिल प्रकल्पग्रस्त सामाजिक संस्थानों के पदाधिकारी और युवा कार्यकर्ता शामिल हुए। संगठन ने कहा कि जिन लोगों की जमीनों पर एयरपोर्ट का निर्माण हुआ है, उन्हें परियोजना से जुड़े रोजगार और कारोबार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। मोर्चे में संस्थानों के अध्यक्ष नंदराज मुंगाजी, सचिव प्रेम पाटिल, उपाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एयरपोर्ट परियोजना के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी जमीनें दी हैं और उस समय उन्हें स्थायी पुनर्वास के साथ बेहतर भविष्य का भरोसा दिलाया गया था। लेकिन अब कार्गो टर्मिनल पर कामकाज में स्थानीय प्रकल्पग्रस्तों को अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन-का आरोप है कि स्थानीय टेंपो और ट्रकों को काम देने के बजाय बाहरी ट्रांसपोर्टरों के माध्यम से परिवहन संबंधी काम कराया जा रहा है।
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स्थानीय वाहनों को एंट्री देने की मांग
प्रकल्पग्रस्त संगठनों का कहना है कि एयरपोर्ट और कार्गो टर्मिनल जैसी बड़ी परियोजनाओं से आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार तथा व्यवसाय के अवसर मिलने चाहिए। संगठन चाहता है कि 27 गांवों के प्रकल्पग्रस्तों के टेंपो और ट्रकों को कार्गो टर्मिनल में प्रवेश देकर परिवहन के काम में शामिल किया जाए। इस-से स्थानीय वाहन मालिकों को नियमित काम मिल सकेगा और उन-की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जमीन देने वाले परिवारों को परियोजना के लाभों में भागीदारी मिलना जरूरी है। उन-का आरोप है कि स्थानीय लोगों की मांगों पर अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी वजह से उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। संगठन ने स्पष्ट किया कि उन-की मुख्य मांग स्थानीय वाहनों को प्रवेश देने, परिवहन का काम उपलब्ध कराने और प्रकल्पग्रस्त परिवारों के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की है।
प्रबंधन को निवेदन देने के बावजूद जवाब नहीं मिलने का आरोप
संस्थानों के पदाधिकारियों के मुताबिक, स्काई हाय कार्गो टर्मिनल, अदाणी एयरपोर्ट प्रबंधन और संबंधित विभागों को पहले भी निवेदन देकर अपनी मांगों से अवगत कराया गया था। संगठन का कहना है कि कई बार मांग उठाने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी के चलते प्रकल्पग्रस्तों ने कार्गो टर्मिनल पर मोर्चा निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे बातचीत और उचित निर्णय के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उन-का कहना है कि स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन को परिवहन के काम में उन्हें अवसर देना चाहिए। संगठन ने संबंधित अधिकारियों से मांगों पर जल्द फैसला लेने और स्थानीय वाहन मालिकों के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की अपील की है।

एक सप्ताह में निर्णय लेने की मांग
संस्थानों के पदाधिकारियों ने बताया कि आंदोलन पहले 19 अक्टूबर को आयोजित करने की योजना थी। हालांकि, पुलिस और संबंधित विभागों की ओर से आंदोलन रोकने तथा एक सप्ताह के भीतर मांगों पर निर्णय लेने का आग्रह किए जा-ने के बाद फिलहाल प्रदर्शन को सांकेतिक रखा गया। संगठन ने कहा कि उन्होंने संबंधित पक्षों को अपनी मांगों पर फैसला लेने का समय दिया है। पदाधिकारियों के अनुसार, यदि तय समय के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो 27 गांवों के प्रकल्पग्रस्त अपने अधिकारों के लिए आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर कार्गो टर्मिनल का कामकाज रोककर जवाब मांगा जाएगा। संगठन ने कहा कि उन-की कोशिश है कि प्रबंधन और संबंधित विभाग इस मुद्दे को गंभीरता से लें और बातचीत के जरिए समाधान निकालें।
प्रकल्पग्रस्तों के अधिकारों का मुद्दा फिर चर्चा मेंनवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी इस मांग ने परियोजना से प्रभावित स्थानीय लोगों को रोजगार और व्यवसाय में अवसर देने का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि जमीन देने वाले परिवारों के पुनर्वास और आजीविका से जुड़े वादों को प्राथमिकता के साथ देखा जाए।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित प्रबंधन और विभाग एक सप्ताह के भीतर उन-की मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं।



