गरीबी सिर्फ आय की कमी नहीं, स्वास्थ्य-शिक्षा और आवास से भी जुड़ा है मुद्दा
Poverty is not merely a lack of income it is an issue also linked to health, education, and housing.

नई दिल्ली: हर साल 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में गरीबी की समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाना, गरीबी से प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और हर व्यक्ति के लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में वैश्विक प्रयासों को मजबूत करना है। गरीबी को केवल आमदनी की कमी के रूप में नहीं देखा जाता। इसका सीधा संबंध स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, आवास, स्वच्छ ईंधन, पेयजल और जीवन स्तर जैसी बुनियादी जरूरतों से भी है। इसी वजह से आज दुनिया में गरीबी का आकलन करने के लिए केवल आय के आंकड़ों के बजाय बहुआयामी मानकों का भी इस्तेमाल किया जाता है। भारत में भी पिछले करीब एक दशक के दौरान बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2013-14 से 2022-23 के बीच करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले।
गरीबी के खिलाफ वैश्विक संघर्ष की शुरुआत
गरीबी उन्मूलन के लिए वैश्विक स्तर पर लंबे समय से प्रयास किए जाते रहे हैं। 1987 में पेरिस में एक लाख से अधिक लोग गरीबी और सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ एकजुट हुए थे। इस दौरान 1948 में अपनाई गई मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा को याद करते हुए यह संदेश दिया गया कि अत्यधिक गरीबी और सामाजिक बहिष्कार मानव गरिमा तथा मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दे हैं। इस आंदोलन ने गरीबी से प्रभावित लोगों की आवाज को वैश्विक स्तर पर सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके बाद 22 दिसंबर 1992 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव अपनाया। इसके जरिए दुनिया भर में गरीबी से प्रभावित लोगों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने और उनके अधिकारों तथा सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करने के प्रयासों को बढ़ावा दिया गया।
2026 में सुरक्षित आवास पर विशेष जोर
2026 में गरीबी उन्मूलन दिवस के तहत सुरक्षित और पर्याप्त आवास के महत्व पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके पीछे यह विचार है कि किसी व्यक्ति के सम्मानजनक जीवन के लिए केवल भोजन और आय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उसके पास सुरक्षित और पर्याप्त आवास भी होना जरूरी है। दुनिया के कई हिस्सों में करोड़ों लोग अपर्याप्त आवास, असुरक्षित घरों या खराब आवासीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में 2.8 अरब से अधिक लोग किसी न किसी रूप में अपर्याप्त आवास की समस्या का सामना कर रहे हैं। ऐसे में गरीबी उन्मूलन की नीतियों में आवास को भी प्रमुख स्थान देने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
गरीबी मापने के अलग-अलग तरीके
गरीबी का आकलन अलग-अलग देशों और संस्थाओं द्वारा अलग-अलग मानकों के आधार पर किया जाता है। विश्व बैंक अत्यधिक गरीबी के आकलन के लिए अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा का इस्तेमाल करता है। वहीं भारत में नीति आयोग का राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) गरीबी को कई आयामों के आधार पर मापता है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े विभिन्न संकेतकों को शामिल किया जाता है। इस दृष्टिकोण में यह देखा जाता है कि किसी परिवार को केवल पर्याप्त आय मिल रही है या नहीं, बल्कि उसे बुनियादी सुविधाएं और आवश्यक सेवाएं भी उपलब्ध हैं या नहीं।
भारत में बहुआयामी गरीबी में बड़ी गिरावट
भारत में बहुआयामी गरीबी का स्तर 2013-14 में 29.17 प्रतिशत था। यह 2022-23 में घटकर 11.28 प्रतिशत रह गया। इस अवधि में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। यह बदलाव स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, खाद्य सुरक्षा, वित्तीय समावेशन, स्वच्छ ईंधन और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच में सुधार से भी जुड़ा है। गरीबी उन्मूलन को एक निरंतर प्रक्रिया माना जाता है। आर्थिक प्रगति के साथ यह भी जरूरी है कि विकास का लाभ समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्गों तक पहुंचे।
सरकारी योजनाओं के जरिए बुनियादी सुविधाओं पर जोर
भारत में गरीबी कम करने और गरीब तथा कमजोर वर्गों की जीवन स्थितियों में सुधार के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना — खाद्य सुरक्षा और जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने पर जोर।
- प्रधानमंत्री आवास योजना — जरूरतमंद परिवारों को पक्का और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने का प्रयास।
- आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना — पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर।
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना — गरीब परिवारों तक स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन की पहुंच बढ़ाने का प्रयास।
- जल जीवन मिशन — ग्रामीण परिवारों तक नल के जरिए पेयजल पहुंचाने पर जोर।
- समग्र शिक्षा अभियान — शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रयास।
इन योजनाओं का व्यापक उद्देश्य केवल गरीबी से बाहर निकालना ही नहीं, बल्कि लोगों को भोजन, आवास, स्वास्थ्य, स्वच्छ ईंधन, पेयजल और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।
गरीबी उन्मूलन के साथ गरिमापूर्ण जीवन भी जरूरी
गरीबी उन्मूलन की चुनौती केवल आर्थिक नहीं है। किसी व्यक्ति को गरीबी से बाहर निकालने के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि उसे सम्मान, समान अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षित आवास और सामाजिक भागीदारी का अधिकार मिले। अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस इसी व्यापक सोच को सामने लाता है कि गरीबी से लड़ाई केवल आंकड़ों को कम करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
इसका अंतिम लक्ष्य ऐसा समाज बनाना है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन जीने का अवसर मिल सके



