लखनऊ के 150 साल पुराने कालीबाड़ी मंदिर में मां काली की विशेष आराधना
Special worship of Goddess Kali at the 150-year-old Kalibari Temple in Lucknow.

उत्तरप्रदेश, लखनऊ: नवरात्रि के सातवें दिन यानी महा सप्तमी पर देशभर में मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी मां काली की विशेष आराधना के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। लखनऊ की घसियारी मंडी स्थित ऐतिहासिक कालीबाड़ी मंदिर में महा सप्तमी के अवसर पर मां काली की विशेष पूजा और आराधना की गई। मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही रही और भक्तों ने मां के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
मां कालरात्रि का उग्र स्वरूप
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन स्वरूपों में मां कालरात्रि का स्वरूप सबसे अधिक उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कालरात्रि का स्वरूप बुराई और अधर्म के विनाश का प्रतीक है। मां का यह स्वरूप भक्तों को भय से मुक्ति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है। मां कालरात्रि को विशेष रूप से रक्तबीज के संहार से भी जोड़ा जाता है। इसी वजह से नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर मां के इस स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है।
करीब 150 साल पुराना कालीबाड़ी मंदिर
लखनऊ के घसियारी मंडी क्षेत्र में स्थित कालीबाड़ी मंदिर को प्राचीन धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर करीब 150 साल पुराना है और लंबे समय से मां काली के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। महा सप्तमी के अवसर पर भी मंदिर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला।
पंचमुण्डी आसन की विशेष मान्यता
इस मंदिर की सबसे खास धार्मिक विशेषताओं में से एक है मां काली का पंचमुण्डी आसन। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां काली यहां एक विशेष पंचमुण्डी आसन पर विराजमान हैं। तंत्र साधना की परंपरा में पंचमुण्डी आसन को विशेष आध्यात्मिक और साधनात्मक महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि यह आसन पांच विशेष जीवों के मुंडों के ऊपर तैयार किया गया था और इसे तांत्रिक साधना में शक्ति, ऊर्जा और आध्यात्मिक सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी विशेष धार्मिक मान्यता के कारण कालीबाड़ी मंदिर को स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच बेहद महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
भक्तों में दिखी गहरी आस्था
महा सप्तमी के मौके पर मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं ने मां काली के दर्शन किए और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। भक्तों ने मां के समक्ष दीप जलाए, प्रसाद चढ़ाया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। नवरात्रि के दौरान मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा के पीछे यही भावना है कि शक्ति की आराधना के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म की स्थापना का संदेश समाज तक पहुंचे।
लखनऊ का कालीबाड़ी मंदिर भी इसी धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महा सप्तमी के दिन श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है



