मंडी में 50 शिक्षकों को प्रशिक्षण
Training of 50 teachers in Mandi

शिमला/मंडी: मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों में किताबें पढ़ने की रुचि विकसित करने और उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से मंडी स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। समग्र शिक्षा के तहत आयोजित इस कार्यशाला में प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों में नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करने और स्कूल पुस्तकालयों को अधिक उपयोगी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस कार्यशाला का आयोजन रूम टू रीड संस्था के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यशाला में शिक्षा गुणवत्ता उपनिदेशक एवं जिला परियोजना अधिकारी, समग्र शिक्षा मीना राठौर ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने और शिक्षण प्रक्रिया में पुस्तकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसी गतिविधियों के लिए तैयार करना है, जिनसे बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ कहानी, बाल साहित्य और ज्ञानवर्धक पुस्तकों में भी रुचि लें।
25 शिक्षा खंडों के 50 शिक्षक ले रहे प्रशिक्षण
इस कार्यशाला में मंडी जिले के 25 शिक्षा खंडों से दो-दो प्राथमिक शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस तरह कुल 50 शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये शिक्षक अपने-अपने शिक्षा खंडों में अन्य शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुस्तकालय आधारित पठन गतिविधियों को जिले के अधिक से अधिक स्कूलों तक पहुंचाना है। प्रशिक्षित शिक्षक अपने विद्यालयों में बच्चों को पुस्तकों से जोड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित कर सकेंगे। इससे स्कूल पुस्तकालयों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने और विद्यार्थियों में स्वतंत्र रूप से पढ़ने की आदत विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर बाल साहित्य पढ़ने पर जोर
जिला पुस्तकालय समन्वयक मीना ठाकुर ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यक्रम की किताबों तक सीमित न रखना है। उन्हें कहानियों, बाल साहित्य और अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे बच्चों को नई जानकारियां हासिल करने के साथ अपनी कल्पनाशक्ति और रचनात्मक सोच को विकसित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि पुस्तकालय बच्चों के सीखने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। यदि विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुसार किताबें उपलब्ध कराई जाएं और उन्हें नियमित पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, तो उनमें पढ़ने की स्वाभाविक आदत विकसित हो सकती है।
भाषा कौशल और रचनात्मकता को मिलेगा बढ़ावा
कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि नियमित पठन से बच्चों के भाषा कौशल, शब्द भंडार, कल्पनाशक्ति और रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है। किताबों के माध्यम से बच्चे अपनी भाषा और संस्कृति को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। साथ ही, उनमें नई चीजें जानने और सवाल पूछने की प्रवृत्ति भी विकसित हो सकती है। मोबाइल फोन और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों को पुस्तकों से जोड़ना शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है। ऐसे में स्कूल पुस्तकालयों को सक्रिय बनाना और शिक्षकों के माध्यम से पठन गतिविधियों को प्रोत्साहित करना इस पहल का प्रमुख हिस्सा है।
कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षित होने वाले 50 शिक्षक आगे अपने-अपने शिक्षा खंडों में इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे। इससे मंडी जिले के प्राथमिक विद्यालयों में पुस्तकालय आधारित शिक्षण गतिविधियों को विस्तार देने और बच्चों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।



