लद्दाख में 3,350 करोड़ की परियोजनाएं शुरू
Projects worth ₹3,350 crore launched in Ladakh

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लद्दाख में 3,350 करोड़ रुपये की पांच विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद से लद्दाख की विकास संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में सड़क संपर्क, बिजली और पानी की सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लद्दाख की प्रगति और विकास की दिशा में यह एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं से लोगों की यात्रा आसान होगी, बिजली की सुविधाओं में सुधार होगा और पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, क्षेत्र की प्राचीन विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
सड़क नेटवर्क में हुआ विस्तार
प्रधानमंत्री मोदी ने लद्दाख में सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2019 तक यहां सड़क नेटवर्क करीब 1,800 किलोमीटर था, जो अब बढ़कर 4,000 किलोमीटर से अधिक हो गया है। इसी तरह, बड़े पुलों की संख्या पहले 19 थी, जो अब बढ़कर करीब 75 हो गई है। हेलीपैड की संख्या भी सात से बढ़कर 40 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लद्दाख में आवागमन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण रहा है। इसके बावजूद क्षेत्र में संपर्क सुविधाओं का विस्तार विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय लोगों के साथ-साथ व्यापार और कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना है।
निम्मू-पदम-दारचा सड़क से सफर होगा आसान
प्रधानमंत्री ने निम्मू-पदम-दारचा सड़क को लद्दाख के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताया। करीब 298 किलोमीटर लंबी यह सड़क लेह के निम्मू को हिमाचल प्रदेश के दारचा से जोड़ती है और जांस्कर घाटी से होकर गुजरती है। यह मार्ग श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह राजमार्गों के अतिरिक्त एक वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध कराएगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस सड़क से पहले करीब 12 घंटे में पूरा होने वाला सफर अब लगभग तीन घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे स्थानीय लोगों की आवाजाही के साथ व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
लेह एयरपोर्ट पर नया टर्मिनल
विकास परियोजनाओं में लेह के कुशोक बकुला रिनपोछे हवाई अड्डे का नया यात्री टर्मिनल भी शामिल है। करीब 640 करोड़ रुपये की लागत से बने इस टर्मिनल का क्षेत्रफल लगभग 23,800 वर्ग मीटर है और इसे सालाना 35 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ लद्दाख की पारंपरिक वास्तुकला की झलक भी शामिल है। टर्मिनल में भू-तापीय ऊर्जा के उपयोग से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और पर्यावरण पर प्रभाव कम करने का प्रयास किया गया है। >
बिजली और जल संरक्षण पर भी ध्यान
इन परियोजनाओं के तहत 9 मेगावाट की हानू लघु जलविद्युत परियोजना और 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खलत्सी ट्रांसमिशन लाइन भी शामिल हैं। इनसे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने और जलविद्युत संसाधनों का उपयोग बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। जल संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत 40 गांवों में 40 जल निकाय विकसित किए गए हैं। लद्दाख में खेती के मौसम के दौरान पानी की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में जल निकायों के माध्यम से पानी का संरक्षण कर जरूरत के समय उसका उपयोग करने पर जोर दिया गया है। इससे सिंचाई और किसानों की आजीविका को सहारा मिलने की संभावना है।
प्राचीन विरासत के संरक्षण की पहल
लद्दाख की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए लेह के सिंधु घाट पर देश के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क का भी उद्घाटन किया गया। पेट्रोग्लिफ यानी चट्टानों पर उकेरी गई प्राचीन आकृतियां क्षेत्र के इतिहास और सभ्यता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देती हैं। इस पार्क का उद्देश्य इन प्राचीन कलाकृतियों का संरक्षण करना, लोगों में इनके प्रति जागरूकता बढ़ाना और जिम्मेदार विरासत पर्यटन को प्रोत्साहित करना है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लद्दाख की कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों के बावजूद क्षेत्र का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन परियोजनाओं से संपर्क सुविधाएं बेहतर होंगी, बिजली और पानी की उपलब्धता मजबूत होगी तथा लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।



