डॉ. कैलाश गायकवाड़ का सस्पेंशन कैंसिल, प्रवीण गाडे की मुश्किलें बरकरार
Dr. Kailash Gaikwad's suspension revoked; Pravin Gade's troubles persist.
नवी मुंबई: मंगलवार को हुई स्थगित जनरल मीटिंग में नगर निगम के दो अधिकारियों के सस्पेंशन को लेकर अलग-अलग फैसला देखने को मिला। रिश्वत मामले में सस्पेंड किए गए एनक्रोचमेंट डिपार्टमेंट के डिप्टी कमिश्नर डॉ. कैलाश गायकवाड़ का सस्पेंशन रद्द करने का निर्णय लिया गया, जबकि बिजली विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर प्रवीण गाडे का सस्पेंशन बरकरार रखने का फैसला किया गया।
42 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए थे गायकवाड़
डॉ. कैलाश गायकवाड़ के खिलाफ एंटी-करप्शन डिपार्टमेंट ने कार्रवाई की थी। आरोप था कि एनक्रोचमेंट डिपार्टमेंट में एक कॉन्ट्रैक्टर का लंबित बिल मंजूर करने के लिए उनसे 42 हजार रुपये की मांग की गई थी। एंटी-करप्शन अधिकारियों ने उन्हें म्युनिसिपल हेडक्वार्टर में कथित तौर पर रकम लेते हुए पकड़ा था। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार कर सस्पेंड कर दिया था। बाद में अदालत से उन्हें जमानत मिल गई। जनरल मीटिंग में टॉपिक नंबर 11 पर चर्चा के दौरान हाउस लीडर सागर नाइक ने यह मुद्दा सदन के सामने रखा। पूर्व मेयर जयवंत सुतार ने सुझाव दिया कि गायकवाड़ का सस्पेंशन समाप्त कर उन्हें एनक्रोचमेंट डिपार्टमेंट से अलग किसी विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर नियुक्त किया जाए। मेयर सुजाता पाटिल ने इस सुझाव को मंजूरी दी। इसके बाद गायकवाड़ का सस्पेंशन रद्द करने का फैसला किया गया।
हालांकि, सदन में यह स्पष्ट किया गया कि सस्पेंशन समाप्त किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि रिश्वत मामले में उनके खिलाफ लगे आरोप समाप्त हो गए हैं। मामले से जुड़ी कानूनी और विभागीय प्रक्रिया अपनी जगह जारी रहेगी।
प्रवीण गाडे का सस्पेंशन रहेगा जारी
दूसरी ओर, बिजली विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर प्रवीण गाडे के सस्पेंशन पर जनरल मीटिंग में सदस्यों ने गंभीर सवाल उठाए। गाडे को 1 जुलाई 2025 को नेरुल में खुले बिजली के तारों की चपेट में आने से दो छात्राओं के घायल होने की घटना के बाद सस्पेंड किया गया था। बैठक में सवाल उठाया गया कि सस्पेंशन के बावजूद गाडे दोबारा काम कैसे कर रहे हैं। इस पर अतिरिक्त आयुक्त सुनील पवार ने सदन को बताया कि गाडे को 2 जुलाई को सस्पेंड किया गया था। बाद में इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर और शहर के इंजीनियरों की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद तत्कालीन कमिश्नर ने उनका सस्पेंशन समाप्त कर दिया था। साथ ही मामले की विस्तृत विभागीय जांच के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद गाडे ने दोबारा ड्यूटी संभाली।
12 करोड़ के बिजली काम से लेकर 6 करोड़ के AC सिस्टम तक सवाल
जनरल मीटिंग में गाडे के कार्यकाल और बिजली विभाग से जुड़े विभिन्न कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी सवाल उठे। बीजेपी पार्षद सूरज पाटिल ने उनके कार्यकाल के दौरान हुए कॉन्ट्रैक्ट और लेन-देन की जांच की मांग की। एमएनएस पार्षद अभिजीत देसाई ने नेरुल क्षेत्र में करीब 12 करोड़ रुपये के बिजली संबंधी कामों का मुद्दा उठाते हुए उनसे जुड़े कार्यों की जांच की मांग की। वहीं, शिवसेना (एकनाथ शिंदे) पार्टी के ग्रुप लीडर मनोज हलदनकर ने म्युनिसिपल हॉस्पिटल में करीब 6 करोड़ रुपये के एयर कंडीशनिंग सिस्टम से जुड़े काम में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया।
हलदनकर ने गाडे के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक उनके कार्यकाल से जुड़े कामों और कॉन्ट्रैक्ट की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक उनका सस्पेंशन बरकरार रहना चाहिए।
मेयर सुजाता पाटिल का स्पष्ट निर्देश
चर्चा के बाद मेयर सुजाता पाटिल ने प्रवीण गाडे का सस्पेंशन बरकरार रखने का फैसला सुनाया। उन्होंने निर्देश दिया कि उनके कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े मामलों की विस्तृत जांच के लिए मामला एड हॉक कमेटी को सौंपा जाए। मेयर ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया कि जांच पूरी होने तक गाडे को किसी अन्य विभाग में नियुक्त नहीं किया जाए। अब उनके कार्यकाल में हुए विभिन्न बिजली कार्यों, कॉन्ट्रैक्ट और संबंधित लेन-देन की जांच पर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर आगे की कार्रवाई केंद्रित रहेगी।
इस तरह एक ही जनरल मीटिंग में दो अधिकारियों के सस्पेंशन को लेकर अलग-अलग निर्णय सामने आए—एक ओर डॉ. कैलाश गायकवाड़ का सस्पेंशन रद्द किया गया, वहीं दूसरी ओर प्रवीण गाडे का सस्पेंशन जांच पूरी होने तक जारी रखने का निर्णय लिया गया।



