‘वंदे मातरम’ सेमिनार पर संग्राम, RSS नेता की मौजूदगी के खिलाफ छात्र संगठनों का हल्ला-बोल
Conflict over 'Vande Mataram seminar student organisations protest RSS leader's presence

कासरगोड : केरल की सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार को लेकर विवाद बढ़ गया है। सेमिनार में RSS से जुड़े संगठन ‘प्रज्ञा प्रवाह’ के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार को मुख्य वक्ता बनाए जाने के विरोध में SFI, NSUI, MSF, KSU और AISF समेत विभिन्न छात्र संगठनों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। यह सेमिनार 6 और 7 अक्टूबर को सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ केरल के लाइब्रेरी सेमिनार हॉल में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन साहित्य अकादमी ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ केरल और अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सहयोग से किया है। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में जे. नंदकुमार को मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल किया गया है।
छात्र संगठनों का आरोप है कि विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान में ऐसे वक्ता और संगठनों को मंच देना संस्थान के लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और समावेशी चरित्र पर सवाल खड़े करता है। SFI, NSUI और MSF ने पहले ही नंदकुमार की भागीदारी और अखिल भारतीय साहित्य परिषद की सह-आयोजक के तौर पर भूमिका पर आपत्ति जताई थी। संगठनों का कहना है कि उनका विरोध ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के आयोजन से नहीं, बल्कि कार्यक्रम में एक विशेष वैचारिक एजेंडे के प्रवेश से है। मंगलवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कार्यक्रम स्थल के बाहर नारेबाजी की और सेमिनार हॉल में प्रवेश करने की कोशिश की। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हॉल में प्रवेश करने से रोक दिया। कुछ छात्र संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराने के बावजूद कई छात्रों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। विश्वविद्यालय के छात्र मामलों के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि पंजीकृत छात्रों को प्रवेश क्यों नहीं दिया गया और इस संबंध में आयोजकों से जानकारी ली जाएगी।
विवाद के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने 5 अक्टूबर को एक सर्कुलर जारी कर ‘वंदे मातरम’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या गायन में जुटे लोगों को परेशान करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। सर्कुलर में कानून की संशोधित धारा 3 का हवाला देते हुए कहा गया है कि राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकना अथवा ऐसे गायन में जुटे लोगों के बीच व्यवधान पैदा करना दंडनीय है। इसमें तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कुछ अन्य प्रतिबंध भी लगाए हैं। प्रशासनिक ब्लॉक स्थित डॉ. बी.आर. आंबेडकर भवन में 6 से 8 अक्टूबर तक सुबह 9:30 बजे से शाम 7 बजे तक प्रवेश को अधिकृत अधिकारियों, चयन समिति के सदस्यों और उम्मीदवारों तक सीमित किया गया है। अन्य लोगों के लिए रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी।
छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कार्यक्रम के उद्देश्य, बाहरी संगठनों की भागीदारी और वक्ताओं के चयन को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। SFI का कहना है कि विश्वविद्यालय का परिसर सभी छात्रों का है और यहां शिक्षा का माहौल लोकतांत्रिक, बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष बना रहना चाहिए। NSUI ने कार्यक्रम को विश्वविद्यालय के कथित ‘भगवाकरण’ की कोशिश बताया है, जबकि MSF ने संस्थागत निष्पक्षता और अकादमिक स्वतंत्रता बनाए रखने की मांग की है। इस बीच सेमिनार का दूसरा और समापन सत्र 7 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का कार्यक्रम है।
‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की कड़ी में हो रहे इस सेमिनार का उद्देश्य साहित्य और इतिहास के संदर्भ में राष्ट्रीय गीत की यात्रा पर चर्चा करना बताया गया है। हालांकि, जे. नंदकुमार की भागीदारी और कार्यक्रम में RSS से जुड़े संगठनों की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने इसे राजनीतिक और वैचारिक विवाद के केंद्र में ला दिया है।



