अखबार, डाक टिकट और सिक्कों में सहेजा गांधी का इतिहास
Gandhi's history preserved in newspapers, postage stamps, and coins.

राजस्थान, बीकानेर: गांधी जयंती महज महात्मा गांधी को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को समझने का भी दिन है। बीकानेर के संग्रहकर्ता किशन सोनी ने गांधीजी से जुड़ी दुर्लभ ऐतिहासिक सामग्री को वर्षों से सहेजकर रखा है। उनके संग्रह में पुराने अखबार, डाक टिकट, सिक्के और विभिन्न स्मृति-चिह्न शामिल हैं, जो बापू की जीवन यात्रा को एक अलग नजरिए से सामने लाते हैं। किशन सोनी के संग्रह में गांधीजी के जीवनकाल के दौर के कई पुराने अखबार सुरक्षित हैं। इनमें विश्वामित्र और पुराने द हिंदू समेत विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें और संपादकीय शामिल हैं। इन अखबारों के माध्यम से यह समझने का अवसर मिलता है कि गांधीजी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके आंदोलनों को उस समय की पत्रकारिता ने किस तरह प्रस्तुत किया था। स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न पड़ाव, गांधीजी की गतिविधियां और उनके आंदोलनों से जुड़ी खबरें इन पुराने समाचार पत्रों में दर्ज हैं। ऐसे में यह संग्रह केवल पुराने अखबारों का संकलन नहीं, बल्कि उस दौर के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
सोनी के संग्रह की खासियत महात्मा गांधी से जुड़े दुर्लभ डाक टिकट भी हैं। भारत के अलावा बांग्लादेश, इंडोनेशिया समेत कई देशों में जारी किए गए गांधीजी से संबंधित टिकट उनके संग्रह का हिस्सा हैं। इन टिकटों में गांधीजी को अलग-अलग रूपों और प्रसंगों के साथ चित्रित किया गया है। कहीं गांधीजी गीता पढ़ते दिखाई देते हैं तो कहीं चरखे के साथ नजर आते हैं। कई डाक टिकटों पर उनके जीवन और विचारों से जुड़े प्रसंगों को चित्रित किया गया है। इस तरह ये टिकट गांधीजी के व्यक्तित्व और गांधीवादी दर्शन को तस्वीरों के माध्यम से समझने का जरिया बनते हैं। संग्रह में गांधीजी से जुड़े पुराने सिक्के और स्मृति-चिह्न भी मौजूद हैं। भारतीय मुद्रा पर गांधीजी की तस्वीर आज आम है, लेकिन सोनी के संग्रह में ऐसे दुर्लभ सिक्के और पदकनुमा स्मृति-चिह्न भी हैं, जिनमें गांधीजी को अलग-अलग गतिविधियों में दर्शाया गया है। कुछ स्मृति-चिह्नों में वे गीता पढ़ते, योग करते और बा के साथ दिखाई देते हैं। किशन सोनी का मानना है कि गांधीजी के बारे में केवल किताबों या मौखिक जानकारी से जानना पर्याप्त नहीं है।
जब कोई व्यक्ति उस दौर का अखबार अपने हाथ में लेकर पढ़ता है या उस समय जारी हुए डाक टिकट और सिक्कों को देखता है, तो इतिहास ज्यादा जीवंत रूप में सामने आता है। सोनी के अनुसार, गांधीजी स्वयं में एक बड़ा ऐतिहासिक खजाना हैं और उनसे जुड़ी वस्तुओं को सुरक्षित रखना जरूरी है। इससे नई पीढ़ी बापू को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उस दौर के दस्तावेजों और वास्तविक संग्रह के माध्यम से भी समझ सकेगी। गांधी जयंती के मौके पर बीकानेर का यह संग्रह यह संदेश देता है कि इतिहास केवल किताबों के पन्नों में दर्ज नहीं होता। वह पुराने अखबार की स्याही, डाक टिकट पर बनी तस्वीर और किसी पुराने सिक्के पर दर्ज छवि में भी जीवित रहता है।
किशन सोनी का यह संग्रह गांधीजी के जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।



