भारत-EU साझेदारी को नई दिशा देने पर जोर, तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा
Emphasis on giving a new direction to the India-EU partnership; discussions held on enhancing technical cooperation.

नई दिल्ली: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत तकनीकी एवं आर्थिक साझेदारी दोनों पक्षों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है। उन्होंने प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे व्यापार, उद्योग और कुशल पेशेवरों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह बात यूरोपीय संसद के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के दौरान कही। बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी और 6G जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के मुद्दे पर विशेष जोर दिया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अनुसंधान, तकनीकी विकास और नवाचार भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने भारत की अनुसंधान एवं नवाचार क्षमता को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल के साथ साझा की।
यूरोपीय संघ को RDI कार्यक्रम में साझेदारी का न्योता
बैठक में डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) से जुड़े कार्यक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने यूरोपीय संघ को भारत के अनुसंधान और नवाचार क्षेत्र में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने ANRF और डीप-टेक स्टार्टअप्स से जुड़े अनुसंधान एवं नवाचार प्रयासों में यूरोपीय सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। भारत का जोर ऐसे क्षेत्रों में तकनीकी क्षमता विकसित करने पर है, जिनका आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था और रणनीतिक क्षेत्रों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। बैठक में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता भी प्रमुख मुद्दों में रहा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रस्तावित FTA को जल्द लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंधों को और व्यापक बनाने से दोनों पक्षों के उद्योगों और व्यवसायों को नए बाजारों तक पहुंच मिल सकती है। साथ ही, इससे कुशल पेशेवरों के लिए भी अवसर बढ़ने की संभावना है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंध पहले से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में FTA को दोनों पक्षों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
हरित और डिजिटल बदलाव में साथ काम करने की प्रतिबद्धता
यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख एंजेलिका विनजिग ने भारत को यूरोपीय संघ का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने हरित और डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत और लचीला बनाने के लिए दोनों पक्षों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक और अन्य उभरते क्षेत्रों में सहयोग को भविष्य के भारत-ईयू संबंधों के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
तकनीक से लेकर व्यापार तक व्यापक सहयोग
बैठक से यह संकेत मिला कि भारत और यूरोपीय संघ के संबंध अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विज्ञान, तकनीक, नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों तक भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं। AI, क्वांटम तकनीक, 6G, सेमीकंडक्टर और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान दोनों पक्षों के लिए तकनीकी क्षमता और नवाचार को बढ़ावा देने का आधार बन सकता है। वहीं, प्रस्तावित FTA आर्थिक संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह की यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में तकनीकी सहयोग और आर्थिक साझेदारी को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य और यूरोपीय संघ के डिजिटल एवं हरित परिवर्तन के एजेंडे के बीच सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने पर भी चर्चा हुई।



