‘A Century of Service’ RSS की सेवा यात्रा पर नई पुस्तक का लोकार्पण
‘A Century of Service’ book launched; RSS’s 100-year journey of service documented.
नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में ‘A Century of Service – The RSS in 100 Acts of Seva’ नामक पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी भर की सेवा गतिविधियों और सामाजिक पहल को 100 सेवा-प्रसंगों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। पुस्तक की लेखिका तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सौंदरराजन हैं।
सेवा कार्यों को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास
विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि यह पुस्तक RSS की लंबे समय से चली आ रही सेवा गतिविधियों, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण से जुड़े उसके दृष्टिकोण को दस्तावेज के रूप में सामने लाती है। उनके अनुसार, किसी भी संस्था या समाज की सेवा-यात्रा को दर्ज करना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे दस्तावेज आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक कार्यों और सामुदायिक सहभागिता की जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
पुस्तक में ‘सेवा’ को सामाजिक दायित्व और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों का उल्लेख किया गया है। समारोह में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सेवा गतिविधियों को केवल आपदा या संकट के समय तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के साथ लगातार जुड़ाव के रूप में भी समझा जाना चाहिए।
गरीब, श्रमिक, महिलाएं और बच्चों तक पहुंच का उल्लेख
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि RSS से जुड़ी सेवा पहल गरीबों, वंचित और हाशिए पर रहने वाले समुदायों सहित समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंची हैं। उन्होंने श्रमिकों, महिलाओं और बच्चों के लिए किए गए सेवा कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सहायता पहुंचाने की गतिविधियों को याद किया। महामारी के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में स्वयंसेवी संगठनों और नागरिक समूहों ने राहत एवं सहायता कार्यों में भाग लिया था।
‘चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण’ पर जोर
पुस्तक के केंद्रीय विचार ‘चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण’ का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने देशभक्ति, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकता को राष्ट्र निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण मूल्यों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का निर्माण केवल संस्थागत व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों के चरित्र, जिम्मेदारी और सामाजिक सहभागिता से भी जुड़ा होता है। इसी संदर्भ में पुस्तक में सेवा गतिविधियों के साथ व्यक्ति और समाज के निर्माण के विचार को भी सामने रखा गया है।
भावी पीढ़ियों के लिए संदर्भ दस्तावेज
उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक RSS की शताब्दी भर की सेवा गतिविधियों का अभिलेख होने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की सेवा परंपरा, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय चेतना को समझने का एक संदर्भ दस्तावेज बन सकती है। पुस्तक की लेखिका डॉ. तमिलिसाई सौंदरराजन ने आरएसएस की सेवा गतिविधियों को विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से संकलित किया है। पुस्तक का उद्देश्य सेवा कार्यों की एक दीर्घकालिक यात्रा को दस्तावेजी रूप में प्रस्तुत करना है।
शताब्दी वर्ष में सेवा गतिविधियों पर चर्चा
RSS ने 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए थे और इसके बाद शताब्दी वर्ष से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में सेवा गतिविधियों पर केंद्रित इस पुस्तक का विमोचन संगठन की सामाजिक भूमिका और सेवा-परंपरा से जुड़े विमर्श को सामने लाता है।
पुस्तक के माध्यम से RSS की ओर से किए गए सेवा कार्यों को क्रमबद्ध रूप से दर्ज करने का प्रयास किया गया है। समारोह में व्यक्त विचारों के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल अतीत का रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण से जुड़े मूल्यों को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है।



