भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के क्रियान्वयन विधेयक को न्यूजीलैंड संसद की मंजूरी
New Zealand Parliament approves the bill for the implementation of the India-New Zealand Free Trade Agreement.

नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ हुए व्यापार समझौते के क्रियान्वयन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है। विधेयक के पक्ष में 93 वोट, जबकि विरोध में 29 वोट पड़े। विपक्षी लेबर पार्टी के समर्थन से यह विधेयक पारित हुआ।न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने संसद से विधेयक पारित होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारत के बड़े बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी और इसके लाभ जल्द दिखाई देने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड सरकार को उम्मीद है कि दोनों देशों की आवश्यक घरेलू प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद यह समझौता इस साल लागू हो सकता है।
95 प्रतिशत न्यूजीलैंड निर्यात पर शुल्क में राहत
भारत-न्यूजीलैंड FTA के तहत न्यूजीलैंड के भारत को होने वाले करीब 95 प्रतिशत वर्तमान निर्यात पर शुल्क या तो समाप्त किया जाएगा या उसमें उल्लेखनीय कमी की जाएगी। समझौता लागू होने के पहले ही दिन न्यूजीलैंड के करीब 57 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। पूरी तरह लागू होने के बाद यह हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 82 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जबकि अन्य उत्पादों पर भी शुल्क में महत्वपूर्ण कटौती होगी। इससे न्यूजीलैंड के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों, जैसे वानिकी एवं लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस, समुद्री उत्पाद, कीवीफ्रूट और सेब को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है। न्यूजीलैंड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वानिकी और लकड़ी के निर्यात के एक बड़े हिस्से को समझौते के लागू होने के साथ ही शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा।
भारतीय उत्पादों को भी न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त पहुंच
समझौते में भारतीय निर्यातकों के लिए भी महत्वपूर्ण बाजार पहुंच का प्रावधान है। भारत सरकार के अनुसार, FTA के तहत भारतीय निर्यात के 100 प्रतिशत हिस्से को न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलने का प्रावधान है। इससे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग सामान, प्रसंस्कृत खाद्य और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। भारत ने हालांकि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा है। इनमें डेयरी और कुछ प्रमुख कृषि उत्पाद शामिल हैं, ताकि घरेलू किसानों और संबंधित उद्योगों के हितों की सुरक्षा की जा सके।
15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के निवेश का प्रावधान
FTA की एक अहम विशेषता न्यूजीलैंड की ओर से भारत में 15 वर्षों में 20 अरब अमेरिकी डॉलर तक निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता है। न्यूजीलैंड के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, इस निवेश को बढ़ाने के लिए दोनों देश निवेश सहयोग और प्रोत्साहन के क्षेत्र में काम करेंगे। भारत में न्यूजीलैंड के निवेशकों की सहायता के लिए विशेष ‘न्यूजीलैंड इन्वेस्टमेंट डेस्क’ स्थापित करने का भी प्रावधान है।
सेवाओं और भारतीय पेशेवरों के लिए भी अवसर
समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। भारत सरकार के अनुसार, इसमें सेवाओं के क्षेत्र में भी बेहतर बाजार पहुंच का प्रावधान किया गया है। भारतीय पेशेवरों, सेवा क्षेत्र की कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए न्यूजीलैंड में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।समझौते में भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा का प्रावधान भी शामिल है। इसके अलावा कुछ भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद काम करने से जुड़े रास्तों को भी आसान बनाने के प्रावधान किए गए हैं। न्यूजीलैंड की संसद से क्रियान्वयन विधेयक पारित होना समझौते को लागू करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण है। न्यूजीलैंड संसद के रिकॉर्ड के अनुसार विधेयक की तीसरी रीडिंग सितंबर 2026 में पूरी हुई। समझौता प्रभावी होने के लिए दोनों देशों की आवश्यक घरेलू प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी है
भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी संकेत दिया है कि भारत-न्यूजीलैंड FTA को अक्टूबर 2026 के अंत तक लागू किए जाने की दिशा में काम चल रहा है। हालांकि अंतिम प्रभावी तारीख दोनों देशों की औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही तय होगी। भारत और न्यूजीलैंड ने इस FTA पर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए थे। अब न्यूजीलैंड की संसद से क्रियान्वयन विधेयक पारित होने के बाद समझौते के लागू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेश का प्रवाह बढ़ाने के लिए व्यापक बाजार पहुंच का ढांचा तैयार हुआ है। समझौते के लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच और न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारतीय बाजार में शुल्क रियायतों का लाभ मिलने की उम्मीद है।



