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किशाऊ परियोजना पर बड़ा कदम, 6 राज्यों के बीच MoU की तैयारी

Major step for Kishau Project; MoU being prepared among six states.

नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर आज नई दिल्ली में अहम समझौता होने जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाले कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से जुड़े प्रतिनिधि परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करेंगे। यह परियोजना लंबे समय से विभिन्न राज्यों के बीच जल बंटवारे और वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर लंबित थी।

यमुना के पुनर्जीवन से भी जुड़ी परियोजना

किशाऊ परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है। सरकार के अनुसार परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यमुना में पानी के प्रवाह को बढ़ाना और नदी के पुनर्जीवन में योगदान देना है। जून 2026 में अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में छह राज्यों के बीच परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी।

केंद्र सरकार उठाएगी जल घटक की 90% लागत

परियोजना को लेकर बनी सहमति के तहत जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत वित्तीय भार छह भागीदार राज्यों के बीच साझा किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य परियोजना से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे वित्तीय और अंतरराज्यीय मतभेदों को दूर करना है। सहमति के अनुसार हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी सहमति बनी है। इसके बदले परियोजना के पावर घटक में हिमाचल प्रदेश के हिस्से की लागत साझा करने का प्रावधान रखा गया है।

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना

किशाऊ परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह एक बहुउद्देशीय जल परियोजना है, जिसमें जल भंडारण, सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन जैसे कई उद्देश्य शामिल हैं। किशाऊ कॉरपोरेशन की परियोजना जानकारी के अनुसार मूल स्वीकृत डिजाइन में परियोजना की क्षमता 660 मेगावाट (4×165 MW) है। परियोजना में लगभग 1,324 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव स्टोरेज और करीब 97,076 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का प्रावधान बताया गया है। परियोजना का प्रस्तावित बांध 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम है। परियोजना से जुड़े आधिकारिक विवरण में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रों में भूमि डूब क्षेत्र तथा पुनर्वास की आवश्यकता का भी उल्लेख है।

छह राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है परियोजना

किशाऊ परियोजना से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सीधे जुड़े हैं। इन राज्यों के बीच जल उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल और बिजली से संबंधित हित इस परियोजना से जुड़े हुए हैं। परियोजना को लेकर सहमति बनने से अंतरराज्यीय जल प्रबंधन में सहयोग का रास्ता मजबूत हुआ है। केंद्र सरकार का मानना है कि संवाद के जरिए लंबे समय से लंबित ऐसे मामलों का समाधान किया जा सकता है। जून में हुई बैठक के बाद केंद्र ने स्पष्ट किया था कि MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

लंबे समय से अटका था प्रोजेक्ट

किशाऊ परियोजना लंबे समय से अंतरराज्यीय सहमति और वित्तीय हिस्सेदारी से जुड़े मुद्दों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थी। सितंबर 15 के प्रस्तावित MoU को इस गतिरोध को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश को परियोजना का वित्तीय बोझ नहीं उठाने को लेकर भी आश्वासन दिया गया है। MoU के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाना है। इसके बाद आवश्यक प्रशासनिक, वित्तीय, पर्यावरणीय और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती छह राज्यों के बीच बनी सहमति को प्रभावी तरीके से लागू करना और परियोजना से जुड़े पुनर्वास तथा पर्यावरणीय पहलुओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना होगी।

किशाऊ परियोजना पर बनी यह सहमति केवल एक बांध परियोजना का मामला नहीं है, बल्कि उत्तर भारत में जल सुरक्षा, सिंचाई, बिजली उत्पादन और यमुना के पुनर्जीवन से जुड़ा एक बड़ा अंतरराज्यीय प्रयास माना जा रहा है।

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