विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जताई भारत की प्रतिबद्धता
Environment Minister Bhupender Yadav reaffirms India's commitment at the World Circular Economy Forum.

गुजरात : भारत ने सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) के सिद्धांतों को अपनी विकास रणनीति में शामिल करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत सतत और पर्यावरण-अनुकूल विकास के लिए संसाधनों के बेहतर उपयोग पर लगातार जोर दे रहा है। मंत्री ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी का उद्देश्य संसाधनों की बर्बादी को कम करना, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना और उत्पादों एवं सामग्रियों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत अपने सतत विकास के ढांचे में सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को और मजबूती से शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- पारंपरिक ज्ञान का आधुनिकीकरण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पुनर्उपयोग (Reuse), मरम्मत (Repair) और संरक्षण (Conservation) जैसी अपनी पुरानी पद्धतियों को आधुनिक नीतियों का हिस्सा बनाया है।
- बुनियादी ढांचे और रीसाइक्लिंग: भारत रीसाइक्लिंग बुनियादी ढांचे के विस्तार, नई तकनीकों को बढ़ावा देने और पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन प्रथाओं की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- सहयोगात्मक दृष्टिकोण: पर्यावरण मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि चक्रीय अर्थव्यवस्था केवल अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास को अधिक संसाधन-कुशल और टिकाऊ बनाने का माध्यम है।
इस उद्घाटन अवसर पर ‘Best Practices for Reuse of Treated Sewage’ और ‘Driving Sustainability – A Guide to India’s Circular Economy and EPR Initiatives’ नामक दो महत्वपूर्ण प्रकाशन भी जारी किए गए। गुजरात में आयोजित 10वें World Circular Economy Forum (WCEF 2026) के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री Bhupender Yadav ने सतत विकास ढांचे में चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को अपनाने और प्राचीन भारतीय मूल्यों का आधुनिकीकरण करने की भारत की मजबूत प्रतिबद्धता जताई।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग, नवाचार और टिकाऊ उत्पादन एवं उपभोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।



