भारत-वियतनाम संबंधों को मजबूती देने पर मंथन, विदेश मंत्रियों की बैठक
Deliberations on strengthening India-Vietnam ties; meeting of foreign ministers.
नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दिल्ली में वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों के विभिन्न पहलुओं, आपसी सहयोग की प्रगति तथा भविष्य में द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने के उपायों पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भारत और वियतनाम के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई गति देने और सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर विचार किया।
तीन वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति
डॉ. एस. जयशंकर ने बैठक के दौरान कहा कि लगभग तीन वर्ष पहले आयोजित संयुक्त आयोग की पिछली बैठक के बाद से भारत और वियतनाम के द्विपक्षीय संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और राजकीय यात्राओं ने आपसी संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विदेश मंत्री ने विशेष रूप से वियतनाम की ओर से हुई दो महत्वपूर्ण राजकीय यात्राओं का उल्लेख किया। इनमें वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम की हाल की भारत यात्रा भी शामिल है। इन उच्चस्तरीय यात्राओं के दौरान दोनों देशों के नेतृत्व ने भारत-वियतनाम संबंधों को और बेहतर तथा व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में कदम
बैठक में दोनों देशों के बीच मौजूद व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। भारत और वियतनाम के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी तथा क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में लगातार संपर्क बढ़ रहा है। दोनों पक्षों के बीच सहयोग को नई प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि 19वीं संयुक्त आयोग बैठक दोनों देशों के लिए अब तक किए गए वादों, लिए गए फैसलों और विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा करने का महत्वपूर्ण अवसर है। साथ ही, यह बैठक भविष्य के लिए नई प्राथमिकताएं तय करने और भारत-वियतनाम सहयोग को और अधिक परिणामोन्मुख बनाने में मदद करेगी।
एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत में वियतनाम की अहम भूमिका
विदेश मंत्री जयशंकर ने वियतनाम को भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ का प्रमुख साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और वियतनाम के बीच सहयोग का विशेष महत्व है। भारत के ‘महासागर विजन’ के संदर्भ में भी वियतनाम को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा जाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आसियान (ASEAN) के साथ भारत की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के ढांचे में वियतनाम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दक्षिण-पूर्व एशिया में वियतनाम की रणनीतिक स्थिति और क्षेत्रीय प्रभाव को देखते हुए भारत उसके साथ अपने संबंधों को लगातार प्राथमिकता देता रहा है।
भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर नजर
बैठक के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों ने आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को अधिक व्यापक बनाने के लिए आवश्यक कदमों पर भी चर्चा की। भारत और वियतनाम के बीच बढ़ता राजनीतिक विश्वास और उच्चस्तरीय संवाद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
19वीं संयुक्त आयोग बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और आसियान के साथ संबंध भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण केंद्र बने हुए हैं। ऐसे में भारत-वियतनाम संवाद से दोनों देशों के बीच मौजूदा सहयोग को और गति मिलने तथा भविष्य के लिए नई प्राथमिकताएं तय होने की उम्मीद है।


