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RBI ने जारी किया साइबर फ्रॉड-विवादित लेनदेन पर नई रूपरेखा का मसौदा

RBI releases draft framework on cyber fraud and disputed transactions.

मुंबई/सान्वी देशपांडे: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साइबर धोखाधड़ी और विवादित लेनदेन से निपटने के लिए एक नई रूपरेखा का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य साइबर फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ बैंकों को संदिग्ध लेनदेन पर तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम बनाना है। नई व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह प्रस्तावित किया गया है कि किसी विवादित या संदिग्ध लेनदेन के सामने आने पर पूरे बैंक खाते पर रोक लगाने के बजाय केवल विवादित लेनदेन से जुड़ी राशि को अस्थायी रूप से रोका जा सकेगा।

पूरे खाते के बजाय विवादित राशि पर रोक

RBI के मसौदा निर्देशों के अनुसार, बैंक कुछ परिस्थितियों में संबंधित खाते में मौजूद पूरी रकम को फ्रीज करने के बजाय केवल उस राशि पर अस्थायी रोक लगा सकेंगे, जिसे लेकर साइबर धोखाधड़ी या विवाद की आशंका है। इससे उन ग्राहकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके खाते में किसी एक संदिग्ध लेनदेन के कारण बाकी वैध धनराशि के इस्तेमाल में भी परेशानी आती है।

मसौदे के तहत यह व्यवस्था विशेष रूप से उन मामलों में लागू की जा सकती है, जहां 1,000 रुपये या उससे अधिक के असामान्य अंतरण को किसी म्यूल अकाउंट या साइबर फ्रॉड से जुड़े खाते से संबंधित होने की आशंका हो। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल अवैध या धोखाधड़ी से प्राप्त धन को आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा सकता है।

AI आधारित निगरानी पर जोर

RBI ने बैंकों से लेनदेन की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया है। प्रस्तावित नियमों के तहत बैंकों को AI आधारित ट्रांजेक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा। इसका उद्देश्य ऐसे लेनदेन की पहचान करना है, जो ग्राहक की सामान्य बैंकिंग प्रोफाइल से अचानक अलग दिखाई देते हैं। इसमें अचानक होने वाले बड़े या असामान्य ट्रांसफर, ग्राहक की सामान्य गतिविधियों से मेल नहीं खाने वाले लेनदेन और ऐसे ट्रांजेक्शन शामिल हो सकते हैं, जिनका संबंध पहले से पहचाने गए साइबर-फ्रॉड नेटवर्क से होने की आशंका हो।

संदिग्ध लेनदेन की पहचान होगी तेज

नई रूपरेखा का एक प्रमुख उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की पहचान और उस पर कार्रवाई के बीच के समय को कम करना है। साइबर अपराध के मामलों में धन कई खातों के जरिए तेजी से ट्रांसफर किया जा सकता है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर संदिग्ध राशि को रोकना जांच एजेंसियों और बैंकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। AI और डेटा आधारित निगरानी प्रणाली के जरिए बैंक ग्राहक के सामान्य लेनदेन व्यवहार का विश्लेषण कर संदिग्ध गतिविधियों को चिन्हित कर सकेंगे। इससे संभावित साइबर फ्रॉड को शुरुआती चरण में रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अगले साल 1 अप्रैल से लागू होने का प्रस्ताव

RBI के मसौदा निर्देश अगले वर्ष 1 अप्रैल से लागू होने वाले हैं। हालांकि, बैंकों को प्रस्तावित व्यवस्था को निर्धारित तारीख से पहले भी अपनाने की अनुमति होगी। इससे बैंक अपनी तकनीकी और परिचालन व्यवस्था को पहले से तैयार कर नई प्रणाली लागू कर सकेंगे।

RBI की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब डिजिटल बैंकिंग, UPI और ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर धोखाधड़ी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। नई व्यवस्था में तकनीक आधारित निगरानी और लक्षित राशि पर रोक जैसे उपायों के जरिए ग्राहकों की सुरक्षा और बैंकिंग प्रणाली में भरोसा मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह मसौदा रूपरेखा है। अंतिम नियमों में सार्वजनिक सुझावों और RBI के अंतिम निर्णय के आधार पर बदलाव संभव हैं।

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