अवैध गाद हटाने में NMMC के 1.5करोड़ खर्च,वसूली पर सवाल
NMMC spends ₹1.5 crore on illegal silt removal; recovery in question.
नवी मुंबई, सान्वी देशपांडे। कोपरखैरने MIDC के पत्थर खदान क्षेत्र में कथित रूप से अवैध तरीके से डाली गई गाद को हटाने के लिए नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) को करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। बारिश के दौरान गाद बहकर समीप के औद्योगिक क्षेत्र में पहुंच गई थी, जिसके कारण चार फैक्ट्रियां प्रभावित हुईं। आपात स्थिति को देखते हुए महानगरपालिका के डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग ने गाद हटाने का काम किया। अब इस खर्च की वसूली संबंधित लोगों से की जाएगी या नहीं, इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बुधवार को हुई NMMC स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में गाद हटाने पर हुए खर्च को मंजूरी के लिए रखा गया। बैठक में पूर्व महापौर एवं समिति सदस्य जयवंत सुतार ने इस मामले को उठाते हुए प्रशासन से गाद के स्रोत और उसके अवैध तरीके से डंप किए जाने को लेकर सवाल किए। सुतार ने दावा किया कि कोपरखैरने में पहुंची गाद मुंबई की मीठी नदी से लाई गई हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई अंतिम पुष्टि नहीं की गई।

चार फैक्ट्रियों में घुसी गाद
मॉनसून की शुरुआत के दौरान जून में कोपरखैरने MIDC के पत्थर खदान क्षेत्र में गाद जमा होने लगी थी। लगातार बारिश के कारण क्षेत्र में पानी भर गया और पानी के बहाव के साथ गाद समीप के औद्योगिक क्षेत्र में पहुंच गई। देखते ही देखते चार फैक्ट्रियों में गाद घुस गई। इससे औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने के साथ ही कर्मचारियों और परिसर में मौजूद लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने आया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए NMMC आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल गाद हटाने के निर्देश दिए। डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग ने आपातकालीन आधार पर कार्रवाई करते हुए गाद को हटाया। इस कार्य पर करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च हुए।
डंपरों को किया गया जब्त
NMMC के अतिक्रमण विभाग के उपायुक्त संजय शिंदे ने समिति को बताया कि शहर में बाहर से लाए जाने वाले मलबे और विभिन्न स्थानों पर अवैध रूप से डंप किए जाने वाले मलबे पर नजर रखने के लिए आठ वार्डों में आठ टीमें गठित की गई हैं। संबंधित सर्कल के उपायुक्त और वार्ड अधिकारी इन टीमों की निगरानी करते हैं। कोपरखैरने की घटना की जांच के दौरान संबंधित डंपरों को जब्त किया गया। कुछ वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही पुलिस थाने में मामला दर्ज किए जाने की जानकारी प्रशासन ने दी। संबंधित लोगों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, कार्रवाई के दौरान मुंबई से गाद लेकर आने वाले कुछ डंपर भी जांच के दायरे में पाए गए।
आपात स्थिति में खर्च जरूरी : प्रशासन
प्रशासन का कहना है कि गाद के कारण औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। बारिश के बीच स्थिति और खराब होने की आशंका थी। ऐसे में लोगों और कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए गाद को तत्काल हटाना जरूरी था। NMMC ने इस संबंध में MIDC प्रशासन से भी संपर्क किया था। हालांकि, आपात स्थिति को देखते हुए तत्काल उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर गाद हटाने की कार्रवाई की गई।
गाद आखिर कहां डंप की गई?
बैठक में गाद हटाने के बाद उसके अंतिम निपटान को लेकर भी सवाल उठाया गया। जयवंत सुतार ने प्रशासन से पूछा कि हटाई गई गाद को आखिर कहां ले जाकर डंप किया गया। इस सवाल पर प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने के बाद गाद के अंतिम निपटान को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। संजय शिंदे ने बताया कि शहर में अवैध तरीके से डंप किए जाने वाले मलबे को हटाने के लिए महानगरपालिका एक आंतरिक प्रक्रिया तैयार कर रही है। संबंधित वार्ड अधिकारियों और कार्यकारी व्यवस्था के माध्यम से इस प्रक्रिया को लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
मिट्टी और गाद के निपटान की अलग व्यवस्था नहीं
प्रशासन ने माना कि NMMC के पास निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे यानी C&D Waste के निपटान की व्यवस्था है, लेकिन गाद और ठोस मिट्टी के निपटान के लिए अलग और स्थायी व्यवस्था नहीं है।
ऐसे में अवैध रूप से गाद या मलबा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद उसे हटाने और निपटाने का आर्थिक बोझ महानगरपालिका पर पड़ रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि गाद हटाने पर खर्च हुए 1.5 करोड़ रुपये संबंधित जिम्मेदार लोगों से वसूल किए जाएंगे या नहीं। इस घटना ने नवी मुंबई में अवैध डंपिंग पर निगरानी और गाद के वैज्ञानिक निपटान के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत को भी सामने ला दिया है।



