NMMC ABC Center कैदखाना या भ्रष्टाचार का अड्डा
NMMC ABC Center: A Prison for Dogs or a Den of Corruption?
नवी मुंबई/सुधीर शर्मा : नवी मुंबई के पशु प्रेमियों की एक शिकायत ने तुर्भे स्थित महानगर पालिका के एबीसी सेंटर की पोल खोल दी है. यह श्वान नियंत्रण केंद्र कहने के लिए तो एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर है लेकिन हकीकत में यह कुत्तों का कैदखाना बन गया है. इन डिफेंस ऑफ एनिमल द्वारा संचालित मनपा का यह एबीसी कुत्तों की नसबंदी एवं रेबीज वैक्सीनेशन के लिए बनाया गया है. आरोप है कि यहां लावारिश कुत्तों को एक पत्रा सेल में महीनों तक कैद करके रखा जाता है. पशु प्रेमियों की मानें तो गंदी आबोहवा में कैद इन बेजुबानों को यहां न तो प्रॉपर वेंटिलेशन मिलता है, और न ही धूप. पशु प्रेमी इसे बड़ा अन्याय मानते हैं और कैदखाने में बंद इन कुत्तों को मुक्त करने की मांग कर रहे हैं.

एबीसी सेंटर में कुत्तों नजरबंद कर रख़ते हे
तुर्भे का ये एबीसी सेंटर जहां नजरबंद कुत्तों में से 5 लावारिस कुत्ते घणसोली के हैं. श्वान नियंत्रण कर्मचारियों ने इन्हें खतरा बताते हुए 9 जनवरी को घणसोली बस डिपो इलाके से पकड़कर यहां नजरबंद कर दिया था. डॉग फीडर अनुप्रिता और पशु प्रेमी सीमा टैंक का दावा है कि ये सभी कुत्ते स्टरलाइज्ड और वैक्सीनेटेड हैं, फिर भी इन्हें छोड़ा नहीं गया। इनके अवाला भी 12 से 15 अन्य कुत्ते एबीसी सेंटर के जेलखाने में कैद हैं. आरोप है कि बीते 5 महीनों से इन बेजुबानों को जरूरी सुविधाओं के बिना पत्रा शेड में कैद रखा गया है. जहां इन्हें प्रॉपर वेंटिलेशन तक नहीं मिलता. सनलाईट और शुद्ध हवा के बिना जी रहे इन बेजुबानों की हालत बेहद खराब है. पशु प्रेमियों का कहना है कि नियमों के मुताबिक नसबंदी या रोगाणुरहित करने के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाना चाहिए, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। मामले को लेकर मनपा अधिकारियों और महाराष्ट्र वेटनरी काउंसिल में शिकायत भी की गई है. और कुत्तों के निर्बीजीकरण, स्टरलाईजेशन और हेल्थ रिपोर्ट देने के साथ ही उन्हें मुक्त करने की मांग की गयी है. पशुप्रेमियों का आरोप है कि खुले माहौल में जीने वाले इन कुत्तों को इस तरह कैदखाने में बंद रखना अन्याय है.
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बेजुबानों के लिए समुचित शेल्टर का निर्माण होना चाहिए-पशुप्रेमी
पशुप्रेमियों की दलील है कि वे लावारिश कुत्तों के नियंत्रण के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन पहले इन बेजुबानों के लिए समुचित शेल्टर का निर्माण होना चाहिए, ताकि वे सुरक्षित माहौल में जी सकें. लेकिन लेकिन श्वान नियंत्रण अधिकारी हैं कि एनिमल सेफ्टी एवं क्रुएल्टी एक्ट का उल्लंघन और मनमानी करते दिख रहे हैं. कैदखाने में 5 महीने से घणसौली के 5 कुत्ते इसका बड़ा सबूत हैं. पशुप्रेमी सीमा टैंक की एक शिकायती मांग पर खुद महाराष्ट्र वेटनरी काउंसिल ने नोटिस जारी कर जांच का आदेश दिया है लेकिन अभी तक उस पर क्या कार्रवाई हुई नहीं पता. समाजसेवक संचू मेनन भी पशुप्रेमियों की मांग को बल देते हुए इन लावारिश कुत्तों की तत्काल रिहाई चाहते हैं.
श्वान नियंत्रण के नाम पर चल रहा एबीसी सेंटर सिर्फ एक छलावा ?
तो असली सवाल ये है कि क्या श्वान नियंत्रण के नाम पर चल रहा तुर्भे का यह एबीसी सेंटर सिर्फ एक छलावा है. क्या एबीसी सेंटर निर्बीजीकरण और स्टरलाइजेशन के नाम पर कुत्तों का कैदखाना है. क्या श्वान नियंत्रण योजना आईडीए और मनपा के अधिकारियों के लिए भ्रष्टाचार और काली कमाई का जरिया है. सवाल ये भी कि जब हर साल हजारों कुर्तों की नसबंदी होती है तब प्रजनन कम क्यों नहीं होता. कहीं ऐसा तो नहीं कि यह सब लूट और बंदरबांट का खेल है. आरोग्य अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं. एबीसी सेंटर में कैमरे से हर चीज छुपाने की कोशिश यहां चल रहे भ्रष्टाचार, मनमानी और धांधली का संकेत दे रही है कि दाल में बहुत कुछ काला है. अब देखना होगा आरोग्य सभापति और आयुक्त रिपोर्ट पर कौन सा रुख अपनाते हैं.



