Konkan हापूस की पहचान पर संकट ?

Is The Identity of Konkan Hapus in Danger ?

नवी मुंबई/प्रतिनिधि : कोकण का देवगढ़ और रत्नागिरी हापुस आम विश्वभर में अपनी अनोखी सुगंध और उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। इसी हापुस ने कोकण के किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान की है। लेकिन अब गुजरात के वलसाड हापुस ने इस प्रतिष्ठा को चुनौती देने की तैयारी कर ली है। गांधीनगर और नवसारी कृषि विश्वविद्यालय ने वर्ष 2023 में “वलसाड हापुस” के लिए भौगोलिक संकेतक (GI टैग) की मांग की है।

इस दावे के बाद कोकण के आम उत्पादक किसान आक्रोशित हो उठे हैं। उनका कहना है कि यदि वलसाड हापुस को GI टैग मिला, तो कोकण हापुस की विशिष्ट पहचान धूमिल होने का खतरा है और इससे बाजार भाव पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। कोकण हापुस को 2018 में GI टैग मिला था, जिसके लिए 2008 से 2018 तक दस्तावेज़ी प्रक्रिया और वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत किए गए थे।

कोकण हापुस उत्पादक व विक्रेता संघ के अध्यक्ष डॉ. विवेक भिडे ने स्पष्ट कहा कि “हापुस कोकण की पहचान है, इसका GI टैग किसी भी कीमत पर दूसरे को नहीं दिया जा सकता। जरूरत पड़ी तो हम कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे। सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों का हमें समर्थन मिलेगा।” इस मुद्दे ने कोकण के किसानों में चिंता और विरोध दोनों को जन्म दिया है, जबकि गुजरात अपनी मांग पर अडिग दिख रहा है।

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