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पत्रकारों के लिए मददगार बन रहे AI टूल्स | विशेषज्ञ किशोर जस्मानी का मार्गदर्शन

AI Tools Boosting Newsrooms: Key Guidance from Expert Kishor Jasmany

मुंबई/12 नवम्बर : पत्रकारिता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों का सही उपयोग किया जाए, तो खबर लेखन, शोध और विश्लेषण कहीं अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, ऐसा मत एआई विशेषज्ञ किशोर जस्मानी ने व्यक्त किया। रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय और मंत्रालय व विधिमंडल वार्ताहर संघ की संयुक्त पहल के अंतर्गत मंत्रालय में प्रिंट और डिजिटल मीडिया पत्रकारों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया।  किशोर जस्मानी ने मार्गदर्शन करते हुए कहा कि ओपन एआई, जेमिनी और को-पायलट ये तीन प्रमुख एआई टूल पत्रकारों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इसके अलावा क्लॉड, डीपसिक और परप्लेक्सिटी भी प्रभावी उपकरण हैं। हर टूल का उपयोग आवश्यकता और उद्देश्य के अनुसार किया जाना चाहिए।

समस्या समाधान और सलाह देने में सहयोगी

जस्मानी के अनुसार, किसी भी एआई टूल का परिणाम तीन बातों पर निर्भर करता है— ज्ञान, प्रॉम्प्टिंग कौशल और तर्कशक्ति।
उन्होंने प्रॉम्प्टिंग के तीन प्रमुख प्रकार — ज़ीरो शॉट, संदर्भ आधारित और भूमिका आधारित — का महत्व भी समझाया। साथ ही पत्रकारिता लेखन अधिक प्रभावी करने में Grammarly ऐप भी उपयोगी बताया। जेमिनी शोध के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, वहीं डीपसिक जवाब देने में अधिक सक्षम साबित होता है। लेकिन उन्होंने कहा कि मेटा एआई पत्रकारिता के लिए उतना प्रभावी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिंग, को-पायलट, गूगल बार्ड, जेमिनी और परप्लेक्सिटी शोध कार्य के लिए उपयोगी हैं, जबकि चैटजीपीटी, गूगल बार्ड और जेमिनी प्रभावी लिखावट में सहायता करते हैं। ये टूल समस्या समाधान और सलाह देने में भी पत्रकारों का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

सटीक प्रॉम्प्ट देना जरूरी, पत्रकारों से किया अभ्यास

इस प्रशिक्षण सत्र में उपस्थित पत्रकारों ने एआई उपकरणों का उपयोग कर प्रत्यक्ष उदाहरणों के माध्यम से अभ्यास किया और संवादात्मक तरीके से मार्गदर्शन प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने चैटजीपीटी का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि फोटो और सही प्रॉम्प्ट देने पर चैटजीपीटी उसी आधार पर समाचार लेख तैयार कर देता है। परंतु इसके लिए सटीक प्रॉम्प्ट देना अत्यावश्यक है। चैटजीपीटी पर आवाज रिकॉर्ड कर मनचाही भाषा में लेखन कराया जा सकता है, साथ ही वॉइस डिक्टेशन के माध्यम से भी यह पत्रकारों की सहायता करता है। इस प्रक्रिया में उन्होंने प्रॉम्प्ट, डिक्टेट और डिस्कशन — इन तीन प्रकार की तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया। उन्होंने यह भी बताया कि एआई टूल्स हस्तलिखित दस्तावेजों का स्वतः टंकलेखन कर सकते हैं। साथ ही पीडीएफ फाइल के टेक्स्ट को चैटजीपीटी की मदद से कैसे उपयोग में लाया जा सकता है, इसका विस्तृत मार्गदर्शन भी उन्होंने दिया।

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