
चित्रकूट में दीपावली की रात, बुंदेलखंडी टीमों ने दीवारी नृत्य से मन मोह लिया
Traditional Bundelkhandi Dance Enthralls Audience During Diwali Amavasya in Chitrakoot
चित्रकूट: कामदगिरि परिक्रमा क्षेत्र में दीपावली आमावस्या के दूसरे दिन भरत मिलाप मंदिर परिसर में बुंदेलखंड के सैकड़ों गांवों की टीमों ने दीवारी नृत्य का शानदार प्रदर्शन किया। ढोलक और नगाड़े की थाप पर बुजुर्ग, बच्चे और युवा मयूर पंख, घुंघरू और लाठियों के साथ युद्ध कला से भरपूर नृत्य में नजर आए।यह पर्व दशहरे से शुरू होकर अमावस्या तक चलता है और शौर्य, उत्साह और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है। हजारों दर्शक इस रंगीन और रोमांचक नृत्य का आनंद लेने के लिए मंदिर परिसर में उपस्थित हुए।
स्थानीय इतिहासकार गोपाल भाई ने कहा कि यह नृत्य बुंदेलखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है और यह पीढ़ियों से सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में उत्साह बनाए रखता है। वहीं, भरत मिलाप मंदिर के महंत मनोहर दास ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल कला और संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि युवाओं में भक्ति और शौर्य की भावना भी जागृत करते हैं।
मौके पर लोगों ने दीवारी नृत्य के हर पल का आनंद लिया और इसे दीपावली उत्सव का एक अनिवार्य और आकर्षक हिस्सा बताया।



