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MLA Mandatai Mhatre | अवैध मंदिरों को लीगल करने मंत्री की बैठक

MLA Mandatai Mhatre | Minister's meeting to legalise illegal temples

नवी मुंबई/प्रतिनिधी: शहर की प्राचीन मंदिरों का अस्तित्व बचाने और प्रकल्पग्रस्तों के घरों के लिए संजीवनी प्रदान करने हेतु नवी मुंबई की विधायक मंदाताई म्हात्रे ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आमदार मंदाताई म्हात्रे द्वारा उठाई गई यह मांग अब शासन स्तर पर जोर शोर से उठाई गई है और इसके लिए आज एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक महाराष्ट्र राज्य के नगरविकास मंत्री माधुरी मिसाळ के अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, जिसमें प्राचीन मंदिरों और प्रकल्पग्रस्तों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंदाताई म्हात्रे ने विधानसभा में निवेदन किया था कि नवी मुंबई हद्दी के भीतर स्थित प्राचीन मंदिरों को संरक्षित किया जाए, ताकि उनका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व कायम रह सके। इसके अलावा, प्रकल्पग्रस्तों के घरों को भी उचित रूप से स्थायीत्व प्रदान करने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की गई थी।

बैठक में यह आश्वासन दिया गया कि पालिका प्रशासन और नगरविकास मंत्री द्वारा इस मुद्दे को प्राथमिकता दी जाएगी। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्राचीन मंदिरों के संरक्षण के लिए पालिका प्रशासन और संबंधित मंत्री से आवश्यक आग्रह किया जाएगा, और जी.आर. के तहत उचित स्थान प्रदान किया जाएगा। साथ ही, प्रकल्पग्रस्तों के घरों को प्रॉपर्टी कार्ड देने की दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में उपस्थति विभिन्न अधिकारीगण और प्रमुख लोग शामिल हुए, जिनमें सचिव असीम गुप्ता, महापालिका उपायुक्त राहुल गेटे, सिडको के प्रमुख अधिकारी पी.टी. गेदाम, डॉ. राजा दयानिधी, उप आयुक्त कैलास गायकवाड, और कई अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक के दौरान सभी ने एकजुट होकर इस मुद्दे को सुलझाने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया।

इसके साथ ही, बैठक में अन्य नवोदित प्रकल्पों के संदर्भ में भी चर्चा की गई, और इन प्रकल्पों को लेकर भी ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया गया। मंदाताई म्हात्रे ने अपने ट्वीट और फेसबुक पोस्ट के माध्यम से सभी संबंधित अधिकारियों और नागरिकों को धन्यवाद दिया और कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर दृढ़ता से काम करेंगे, ताकि नवी मुंबई में प्राचीन मंदिरों और प्रकल्पग्रस्तों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य था नवी मुंबई के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना और प्रकल्पग्रस्तों के अधिकारों की रक्षा करना। आमदार मंदाताई म्हात्रे के इस प्रयास को लेकर नागरिकों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, क्योंकि यह कदम न केवल मंदिरों की महत्ता को बनाए रखेगा, बल्कि प्रकल्पग्रस्तों के जीवन को भी सुधारने का काम करेगा।

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