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मुंबई में सभी कबूतरखाने होंगे बंद! श्वसन और फेफड़ों की बीमारियों में बढ़ोतरी के चलते सरकार का बड़ा फैसला

All pigeon houses in Mumbai will be closed! Government's big decision due to increase in respiratory and lung disease

मुंबई,प्रतिनिधि : मुंबई में कबूतरखानों से फैल रही बीमारियों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। श्वसन तथा फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों में अचानक बढ़ोतरी होने और कुछ मामलों में नागरिकों की मृत्यु होने के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि अगले एक महीने में शहर के सभी कबूतरखाने बंद किए जाएं। यह महत्वपूर्ण जानकारी उद्योग मंत्री उदय सामंत ने गुरुवार, 3 जुलाई को विधान परिषद में प्रश्नोत्तर काल के दौरान दी। उन्होंने बताया कि सरकार को कई क्षेत्रों से शिकायतें मिली थीं कि कबूतरखानों के कारण फंगल इन्फेक्शन, सांस लेने में दिक्कत और सीवियर फेफड़ों के संक्रमण जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं।

मुंबई में 51 कबूतरखाने, कई ऐतिहासिक

मुंबई में फिलहाल 51 कबूतरखाने मौजूद हैं, जिनमें से कुछ 100 से 150 साल पुराने हैं। इन कबूतरखानों में से कुछ अब बंद हैं, जबकि बाकी अभी भी सक्रिय हैं। दादर का कबूतरखाना तो ऐतिहासिक धरोहर के रूप में दर्ज किया गया है। लेकिन अब ये स्थान मुंबईकरों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। शिवसेना (शिंदे गट) की विधायक मनीषा कायंदे ने इस मुद्दे को विधान परिषद में उठाते हुए सभी कबूतरखानों को तत्काल बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इनसे आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर हो रहा है। भाजपा विधायक चित्रा वाघ ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उनकी मामी की मृत्यु कबूतरों की बीट से फैली बीमारी के कारण हुई थी। उन्होंने अंधेरी (भरडावाडी) स्थित कबूतरखाना बंद कराने की कोशिश की थी, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते आज भी वह स्थान चालू है। चित्रा वाघ ने मांग की कि सिर्फ कबूतरखाने बंद करना ही नहीं, बल्कि कबूतरों को दाना डालने पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ धार्मिक आस्था या परंपरा का मामला नहीं, बल्कि लोगों की जान का सवाल है।

जागरूकता अभियान की भी जरूरत

उद्योग मंत्री उदय सामंत ने बताया कि मुंबई महानगरपालिका को सिर्फ कबूतरखाने बंद करने के निर्देश नहीं दिए गए हैं, बल्कि आसपास के रहिवासियों और पर्यटकों को भी जागरूक करने का आदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग कबूतरों को दाना डालते हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि दादर स्थित कबूतरखाने को पहले दो सालों के लिए बंद किया गया था, लेकिन बंदी के बावजूद वहां लोग दाना डालते रहे। इससे बीमारी का खतरा खत्म नहीं हो पाया।

क्या है आगे की योजना?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि:

  • एक महीने के भीतर सभी कबूतरखाने बंद किए जाएंगे।
  • मुंबई में कबूतरों से फैलने वाली बीमारियों को लेकर जनजागरण अभियान शुरू किया जाएगा।
  • कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • ऐतिहासिक कबूतरखानों को लेकर विशेष समिति बनाई जाएगी, जो तय करेगी कि उन्हें कैसे संरक्षित रखा जाए बिना सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डाले।

मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में कबूतरखानों से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। सरकार का यह फैसला स्वास्थ्य की दृष्टि से एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करता है और क्या यह पहल शहर को बीमारियों से बचाने में कारगर साबित होती है।

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