Mumbai Rain : अर्ली मानसून से Mumbai का सट्टा बाजार ध्वस्त, जानिए किसको लगा करोड़ों का चूना
Early Monsoon Crashes Betting Market; Torrential Rains Drench Mumbai”
मुंबई-सुधीर शर्मा/ 2025 में मानसून महाराष्ट्र में सामान्य से 10 दिन पहले आ गया है। IMD (भारतीय मौसम विभाग) के अनुसार, मुंबई और आसपास के इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों और आम जनता को राहत मिली है। हालांकि माना जा रहा था कि महाराष्ट्र में अबकी बार 6 या 7 जून के करीब मानसून दस्तक देगा, लेकिन यह खेल इस बार पलट गया. मई 7 को पहली बारिश हुई थी और 25 मई को झमाझम बारिश के साथ मानसून ने दस्तक दे दी. सूत्रों की मानें तो मानसून इतनी जल्दी आएगा इसका किसी को भी अंदेशा नहीं था. मई महीने में जब अक्सर उमस और धूप बरसती है अबकी बार बादल बरस रहे है. यानी जून आने से 10 दिन पहले ही जलवायु परिवर्तन ने मौसम को डीरेल कर दिया है. तड़तड़ाती बिजली, गुस्साए हुए बादलों की रफ्तार, हवाओं के साथ झमझमाती बारिश की बौछारों ने पूरा जीवन अस्त व्यस्त कर दिया है.
बादलों ने बाजार के मूड और मकसद पर फेरा पानी
मौसम विभाग हर साल 7 से 12 जून के बीच मानसून के आगमन की भविष्यवाणी करता है. इस भविष्यवाणी का न सिर्फ किसान इंतजार करते हैं बल्कि जलवायु परिवर्तन का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक और छात्रों के साथ ही कवि शायर एवं युवा पीढ़ी भी बेसब्री से इंतजार करती है. कईयों के लिए यह मनोरंजन और मौज मस्ती का मौसम है तो कईयों के लिए कारोबार का. देश के सट्टा बाजार के लिए मानसून एक ऐसे मौसम है जिसमें चंद मिनटों में लाखों करोड़ों की बाजी लगती है.मानसून की पहली बारिश पर हजारों करोड़ का दांव लगता है..बाजी लगती है लेकिन काले बादलों ने इस बार सट्टा बाजार का मूड और मकसद दोनों खराब कर दिया है.सट्टा बाजार को 2 लाख करोड़ का झटका-सूत्र
सूत्रों की मानें तो मुंबई की पहली रेन कब, कहां और कितनी होगी इस पर हल साल 2 लाख करोड़ से अधिक का दांव लगता है. बादलों पर दांव लगाने वालों की मानें तो 10 जून की बारिश मुंबई में कब गिरेगी इस पर सारा बाजार नजर लगाए हुए था. मई के महीने में बदलते मौसम को देखते हुए कई लोग इस बार ज्यादा सट्टा लगाने के मूड में थे. जबकि कुछ लोग जून के आने के इंतजार में थे लेकिन किसी की नहीं चली. भूरे बादलों ने समय से पहले मानसून की दस्तक दिला दी. सूत्रों की मानें तो इस बार बेमौसम मानसून से तकरीबन डेढ़ लाख करोड़ के सट्टे पर पानी फिर गया है. सट्टे से जुड़े कुछ सूत्रों ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि इस बार का मानसून सट्टा खिलाने और खेलने वाले दोनों के लिए नुकसानदायक सिद्ध हुआ है. बाजी 10जून की पहली बारिश पर लगी थी लेकिन मानसून 25 मई को आ गया और पूरा मजा किरकिरा हो गया. फिलहाल सबको इंतजार है बारिश के थमने का और फिर जून में शुरू होने का है.देखते हैं बादलों की यारी किसके साथ होती है.
मुंबादेवी मंदिर से जुड़ी है मानसून की कहानी!
मानसून की बारिश पर सट्टा लगाने की परंपरा बहुत पुरानी है। इसे आम बोलचाल में “बरसात का सट्टा” कहा जाता है। यह परंपरा 1880 के दशक में शुरू हुई थी, जब लोग इस बात पर सट्टा लगाते थे कि बारिश कब और कहां गिरेगी — खासकर मुंबई के मुंबादेवी मंदिर के टैंक में पहली बूंद गिरने का समय क्या होगा. यह प्रथा राजस्थान से शुरू हुई थी, जहाँ मारवाड़ी समुदाय के लोग पानी की भारी कमी के चलते मानसून के आगमन पर सट्टा लगाते थे। बाद में यह चलन कलकत्ता और बॉम्बे (अब मुंबई) तक फैल गया। आज के समय में “बरसात का सट्टा” एक परंपरा के रूप में लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन राजस्थान के फलोदी जैसे इलाकों में अब भी कुछ लोग बारिश, चुनाव और क्रिकेट जैसे मुद्दों पर सट्टा लगाते हैं। वहाँ ये तय किया जाता है कि किस दिन, किस नाली से पानी बहेगा — और उसी पर पैसे लगाए जाते हैं।


