महाकुंभ का आगाज: राष्ट्रपति मुर्मु ने किया धर्मध्वज पूजन
Beginning of Mahakumbh: President Murmu worshiped the religious flag

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेले का आज भव्य धार्मिक समारोह के साथ औपचारिक शुभारंभ हो गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नासिक के पवित्र रामकुंड में आयोजित समारोह में विधि-विधान के साथ धर्मध्वज का पूजन किया और ध्वजारोहण किया। राष्ट्रपति के इस धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही सिंहस्थ कुंभ पर्व के आगामी आयोजनों का शंखनाद हो गया।
सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में धर्मध्वज का विशेष महत्व है। इसे धर्म, आस्था, आध्यात्मिक चेतना और सनातन परंपरा का प्रतीक माना जाता है। धर्मध्वज का पूजन और ध्वजारोहण किसी धार्मिक आयोजन के शुभारंभ का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। नासिक के रामकुंड में आयोजित इस समारोह ने सिंहस्थ कुंभ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह को नई ऊर्जा दी है।
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गौरतलब है कि महाराष्ट्र के दो प्रमुख धार्मिक केंद्रों नासिक और त्र्यंबकेश्वर में प्रत्येक 12 वर्ष में सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन होता है। यह देश के सबसे बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों में से एक है। इस महापौर के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी करोड़ों श्रद्धालु नासिक और त्र्यंबकेश्वर पहुंचते हैं। श्रद्धालु पवित्र गोदावरी नदी में स्नान कर पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हैं।
नासिक में रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त तीर्थ को पवित्र स्नान के प्रमुख केंद्रों के रूप में विशेष धार्मिक मान्यता प्राप्त है। कुंभ मेले के दौरान इन दोनों स्थानों पर साधु-संतों, अखाड़ों, धार्मिक संस्थाओं और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति देखने को मिलती है।
करीब 20 महीने तक चलने वाले इस सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान स्नान के लिए विशेष मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। कार्यक्रम के अनुसार नासिक में 44 और त्र्यंबकेश्वर में 53 स्नान मुहूर्त होंगे। इन धार्मिक अवसरों पर लाखों श्रद्धालुओं के एकत्र होने की संभावना है। इतने बड़े स्तर पर आयोजन को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा, यातायात और व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा रामकुंड में धर्मध्वज पूजन और ध्वजारोहण के साथ महाराष्ट्र में आस्था, परंपरा और अध्यात्म के इस महापर्व की औपचारिक शुरुआत हो गई है। अब देश-दुनिया के श्रद्धालुओं की नजरें नासिक और त्र्यंबकेश्वर पर टिकी हैं, जहां आने वाले समय में सिंहस्थ कुंभ की भव्य धार्मिक गतिविधियां देखने को मिलेंगी।



