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देशभर में विजयादशमी की धूम, राष्ट्रपति और पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

Vijayadashami celebrated with great enthusiasm across the country; President and PM Modi extend their best wishes.

मुंबई:  देशभर में आज विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व सत्य की असत्य पर और सद्प्रवृत्तियों की दुष्प्रवृत्तियों पर विजय का प्रतीक माना जाता है। अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला विजयादशमी का त्योहार लोगों को सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलते की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक अनुष्ठान, शस्त्रपूजा, रावण दहन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। त्योहार को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

भगवान श्रीराम की विजय का प्रतीक है दशहरा

विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया था। इसी परंपरा के तहत देश के अनेक शहरों और कस्बों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। इन आयोजकों के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि अहंकार, अन्याय और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की ही जीत होती है। देश के विभिन्न हिस्सों में रामलीला के मंचन के बाद रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। कई स्थानों पर मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है, जहां परिवार और बच्चे उत्सव का आनंद लेते हैं।

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शस्त्रपूजा और सीमोल्लंघन की परंपरा

विजयादशमी का संबंध महाभारत की मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपना अज्ञातवास पूरा करने के बाद इसी दिन अपने शस्त्र फिर से धारण किए थे। इसी मान्यता के चलते कई स्थानों पर शस्त्रपूजा की परंपरा निभाई जाती है। लोग अपने औजारों, वाहनों और कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा कर सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं। महाराष्ट्र में दशहरे के अवसर पर सीमोल्लंघन की परंपरा भी प्रचलित है। इसके तहत लोग शुभ कार्यों की शुरुआत और नई उपलब्धियों की कामना के साथ प्रतीकात्मक रूप से सीमा पार करते हैं। कई स्थानों पर सेना और अन्य सुरक्षा बलों में भी परंपरा के अनुसार शस्त्रपूजा के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह पर्व साहस, कर्तव्य और विजय के संकल्प को मजबूत करने का संदेश देता है।

महाराष्ट्र में आपट्याची पानं बांटकर दी जाती हैं शुभकामनाएं

महाराष्ट्र में दशहरे के दिन आपटे के पेड़ की पत्तियों को सोने का प्रतीक मानकर एक-दूसरे को देने की परंपरा है। लोग इन पत्तियों को प्रतीकात्मक सोना मानते हुए परिवार, मित्रों और परिचितों को देते हैं तथा दशहरे की शुभकामनाएं देते हैं। घरों में विशेष पकवान और मिठाइयां बनाई जाती हैं। लोग मंदिरों में दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। शिक्षण संस्थानों में भी इस पर्व का विशेष महत्व है। कई जगह छोटे बच्चों के लिए पाटीपूजन और सरस्वती पूजा की परंपरा निभाई जाती है। इसे शिक्षा, ज्ञान और नई शुरुआत के लिए शुभ अवसर माना जाता है। घरों और सार्वजनिक स्थानों पर पूजा-अर्चना के साथ उत्सव का माहौल बना हुआ है।

नवरात्रि का समापन, अलग-अलग राज्यों में विशेष परंपरा

विजयादशमी के साथ ही शारदीय नवरात्रि का समापन भी होता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने के बाद कई स्थानों पर स्थापित घटों का विसर्जन किया जाता है। देश के अलग-अलग राज्यों में दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं और सांस्कृतिक रंगों के साथ मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के समापन के अवसर पर ‘सिंदूर खेला’ की परंपरा निभाई जाती है। वहीं, कई अन्य क्षेत्रों में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन और धार्मिक आयोजकों के जरिए पर्व का समापन होता है। देशभर में अलग-अलग रीति-रिवाजों के बावजूद इस त्योहार का मूल संदेश एक ही है—बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत।

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं

विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने इस पर्व को उत्साह, विश्वास और विजय का प्रतीक बताते हुए कामना की कि यह अवसर लोगों को अपने संकल्प पूरे करने की नई प्रेरणा दे तथा सभी के जीवन में सुख, सफलता और समृद्धि लेकर आए। देश के शीर्ष नेताओं की शुभकामना के बीच विजयादशमी का पर्व पूरे देश में धार्मिक आस्था और उत्सव के वातावरण में मनाया जा रहा है। यह त्योहार लोगों को अपने जीवन में सकारात्मकता अपना ने, बुराइयों से दूर रहने और सत्य व सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

कुल मिलाकर, विजयादशमी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में निहित नैतिक मूल्यों का प्रतीक भी है। देशभर में मनाया जा रहा यह पर्व एक बार फिर सत्य, साहस, सदाचार और सकारात्मक सोच के महत्व को रेखांकित कर रहा है।

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