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बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर रोक

Bombay High Court bans bursting of firecrackers on public roads

मुंबई; सान्वी देशपांडे: दिवाली से पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने पटाखों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर लगाई गई रोक केवल किसी एक त्योहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह आदेश पूरे साल और सभी त्योहारों के दौरान लागू रहेगा। यानी दिवाली के साथ-साथ गणेशोत्सव, नवरात्रि, क्रिसमस और अन्य त्योहारों के समय भी सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं होगी।

Bombay HC issues major decision ahead of Diwali, bans bursting of firecrackers on streets for the entire year
Bombay HC issues major decision ahead of Diwali, bans bursting of firecrackers on streets for the entire year

गणेशोत्सव के दौरान दिए गए आदेश का दायरा बढ़ाया

दरअसल, सितंबर में गणेशोत्सव के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्देश दिया था। यह मामला त्योहारों के दौरान बढ़ते ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर अदालत के स्वत: संज्ञान और संबंधित जनहित याचिकाओं से जुड़ा था। अब अदालत ने अपने पहले के आदेश का दायरा बढ़ाते हुए इसे पूरे साल लागू करने की बात कही है। अदालत ने कहा कि पटाखों से केवल वायु प्रदूषण ही नहीं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है। त्योहारों के बाद बढ़ने वाला जहरीला प्रदूषण विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट ने प्रदूषण के बढ़ते स्तर और नियमों के पालन में कमी को लेकर भी चिंता जताई।

सार्वजनिक स्थानों पर पटाखों की अनुमति नहीं

कोर्ट के निर्देश के मुताबिक सार्वजनिक स्थानों, जिनमें सड़कें, गलियां और फुटपाथ शामिल हैं, वहां पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) सहित संबंधित अधिकारियों को लोगों तक इस आदेश की जानकारी पहुंचाने और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि लोगों को पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। इसके लिए स्कूलों और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े माध्यमों में जागरूकता अभियान चलाने की बात भी सामने आई है। साथ ही शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

पटाखों की बिक्री और निर्माण पर रोक नहीं

महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत के इस आदेश का मतलब पटाखों के निर्माण या बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, निर्देश मुख्य रूप से सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने से संबंधित है। इसलिए इसे पटाखों की खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

कानून का पालन जरूरी

दिवाली जैसे बड़े त्योहार से पहले हाई कोर्ट का यह फैसला सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि त्योहार मनाने की स्वतंत्रता के साथ-साथ अन्य नागरिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार का भी सम्मान किया जाना जरूरी है।

अब चुनौती इस आदेश को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की होगी। पुलिस, स्थानीय प्रशासन और नागरिक निकायों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी, ताकि सार्वजनिक सड़कों और रास्तों पर पटाखे फोड़ने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

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