
उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय में 6 महीने में शुरू होगा बोलीभाषा केंद्र
A centre for dialects will be set up at North Maharashtra University within 6 months.
जलगांव: अंकिता सिंह, महाराष्ट्र के खानदेश क्षेत्र की समृद्ध बोलीभाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए कवयित्री बहिणाबाई चौधरी उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय में अगले छह महीनों के भीतर ‘बोलीभाषा केंद्र’ शुरू किया जाएगा। इसके लिए महाराष्ट्र शासन के मराठी भाषा विभाग की ओर से आवश्यक निधि उपलब्ध कराई जाएगी। उद्योग एवं मराठी भाषा मंत्री डॉ. उदय सामंत ने जलगांव में आयोजित ‘अभिजात मराठी भाषा सप्ताह-2026’ कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की। महाराष्ट्र शासन के मराठी भाषा विभाग और कवयित्री बहिणाबाई चौधरी उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय के भाषा अध्ययन प्रशाला एवं अनुसंधान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में मंत्री डॉ. सामंत ने मराठी भाषा के प्रचार-प्रसार, बोलीभाषाओं के संरक्षण और भाषा के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खानदेश की बोलीभाषाएं क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और साहित्यिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन भाषाओं को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय में बोलीभाषा केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस केंद्र के माध्यम से खानदेश की विभिन्न बोलीभाषाओं के अध्ययन, शोध और उनके भाषाई स्वरूप के दस्तावेजीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस वर्ष से होगा खानदेशी साहित्य सम्मेलन
मंत्री डॉ. सामंत ने घोषणा की कि खानदेश की बोलीभाषाओं और साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए इस वर्ष से ‘खानदेशी साहित्य सम्मेलन’ आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही महाराष्ट्र की सभी बोलीभाषाओं का शब्द-संग्रह तैयार करने का काम भी मराठी भाषा विभाग के माध्यम से शुरू किया जाएगा। इससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित बोलीभाषाओं के शब्दों को संकलित करने और उनकी भाषाई विशेषताओं को दर्ज करने में मदद मिलेगी। उन्होंने मराठी भाषा में शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने की जरूरत भी बताई। डॉ. सामंत ने कहा कि भाषा और साहित्य के विकास में विद्यार्थियों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। इसलिए विद्यार्थियों के लिए अलग साहित्य सम्मेलनों का आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी अपनी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके।
मराठी की समृद्ध परंपरा को मिलेगा नया मंच
डॉ. सामंत ने कहा कि मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने से उसकी प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और भारतीय ज्ञान परंपरा में योगदान को विशेष पहचान मिली है। ऐसे में बोलीभाषाओं का संरक्षण भी भाषा के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। बोलीभाषाएं स्थानीय संस्कृति, लोकसाहित्य, परंपराओं और जनजीवन से जुड़ी होती हैं। इनके अध्ययन से भाषा की विविधता और ऐतिहासिक विकास को समझने में सहायता मिलती है। विश्वविद्यालय में प्रस्तावित बोलीभाषा केंद्र और खानदेशी साहित्य सम्मेलन के माध्यम से क्षेत्र की भाषाई विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, राज्य की सभी बोलीभाषाओं का शब्द-संग्रह तैयार करने की पहल से महाराष्ट्र की भाषाई विविधता को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वी. एल. माहेश्वरी, प्र-कुलगुरु प्रो. एस. टी. इंगले, राज्य मराठी विकास संस्था के निदेशक डॉ. श्यामकांत देवरे, विद्यार्थी विकास विभाग के निदेशक प्रो. प्रवीण महाले और भाषा एवं विचारधारा प्रशाला के निदेशक प्रो. म. सु. पगारे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



