
चंद्रपुर में महाकाली महोत्सव शुरू
Mahakali Mahotsav begins in Chandrapur
चंद्रपुर: महाराष्ट्र के चंद्रपुर में पांच दिवसीय श्री माता महाकाली महोत्सव की आज से शुरुआत हो गई है। विधायक किशोर जोरगेवार की संकल्पना से श्री महाकाली माता समिति की ओर से इस महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव की शुरुआत एकवीरा देवी मंदिर से माता महाकाली की चांदी की प्रतिमा की पालकी यात्रा के साथ हुई। नगर भ्रमण करते हुए पालकी को महाकाली मंदिर तक ले जाया गया। इस दौरान माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला।
इस वर्ष महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और किसानों को हो रही परेशानियों को ध्यान में रखते हुए महोत्सव को सादगी से मनाने का निर्णय लिया गया है। आयोजन के दौरान होने वाले मनोरंजन और भक्ति संगीत के सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। विधायक किशोर जोरगेवार ने बताया कि इन कार्यक्रमों पर खर्च होने वाली राशि सूखा प्रभावित किसानों की सहायता के लिए दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए महोत्सव के पारंपरिक कार्यक्रमों के बजाय सामाजिक कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके माध्यम से जरूरतमंदों की मदद करने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया जाएगा।
9,999 बालिकाओं का होगा सम्मान
महोत्सव के दौरान बालिकाओं के सम्मान को लेकर भी विशेष पहल की जाएगी। आयोजन समिति की ओर से 9,999 बालिकाओं का सम्मान किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य समाज में बेटियों के महत्व को रेखांकित करना और उनके प्रति सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा, अष्टमी के दिन चंद्रपुर में जन्म लेने वाली बालिकाओं को चांदी का सिक्का भेंट किया जाएगा। इस पहल के जरिए बालिकाओं के जन्म को उत्सव के रूप में मनाने और उनके सम्मान का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सेवा पर जोर
माता महाकाली महोत्सव चंद्रपुर में धार्मिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। हर वर्ष इस महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिलता है। हालांकि, इस बार सूखे और किसानों की समस्याओं को देखते हुए आयोजन का स्वरूप बदला गया है। आयोजकों ने मनोरंजन कार्यक्रमों पर होने वाले खर्च को किसानों की सहायता के लिए देने का निर्णय लेकर सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता दी है। वहीं, बालिकाओं के सम्मान और अष्टमी पर जन्म लेने वाली बच्चियों को चांदी का सिक्का देने जैसी पहल भी महोत्सव का हिस्सा होगी।
पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ सामाजिक गतिविधियों पर ध्यान दिया जाएगा। इस बार आयोजन का मुख्य संदेश धार्मिक आस्था के साथ जरूरतमंदों की मदद, किसानों के प्रति संवेदनशीलता और बालिकाओं के सम्मान को बढ़ावा देना है।



