शिवपुरी में माटी शिल्पियों को बड़ी राहत, हाट-बाजारों में नहीं लगेगा कोई कर
In Shivpuri, clay sculptors will have a big life, no tax will be charged in haat-bazaars.

शिवपुरी: नवरात्रि और दीपावली के त्योहारों को देखते हुए शिवपुरी जिला प्रशासन ने पारंपरिक माटी शिल्पियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला लिया है। जिला प्रशासन के इस निर्णय से मिट्टी से पारंपरिक उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका चलाने वाले शिल्पकारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के आदेश के अनुसार हाट-बाजारों में मिट्टी की मूर्तियां, खिलौने, दीपक, सरैया, मटके और अन्य सजावटी सामग्री बेचने वाले माटी शिल्पियों से कोई कर नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें हाट-बाजारों में अपने उत्पादों की बिक्री के लिए निशुल्क स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
पारंपरिक माटी कला को मिलेगा बढ़ावा
माटी कला भारत की पारंपरिक हस्तकलाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। त्योहारों के दौरान मिट्टी के दीयों, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में स्थानीय शिल्पियों के लिए यह समय अपनी कला और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर होता है। लेकिन कई छोटे शिल्पकारों के सामने बाजार में दुकान या स्थान लेने का खर्च और अन्य शुल्क एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाते हैं। जिला प्रशासन के इस फैसले से इस तरह के खर्च में राहत मिलेगी और शिल्पकार अपनी मेहनत से तैयार किए गए उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकेंगे।
नहीं देना होगा हाट-बाजार कर
प्रशासन के निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पात्र माटी शिल्पियों से हाट-बाजारों में उनके उत्पादों की बिक्री के लिए कर नहीं लिया जाएगा। इसका सीधा लाभ छोटे और पारंपरिक शिल्पकार परिवारों को मिलेगा। त्योहारों के दौरान बिक्री बढ़ने पर शिल्पियों की आमदनी में भी सुधार होने की संभावना है। खासकर मिट्टी के दीये, मूर्तियां और सजावटी सामान बनाने वाले परिवारों के लिए दीपावली का बाजार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
निशुल्क मिलेगा बाजार में स्थान
प्रशासन ने केवल कर में राहत देने तक ही फैसला सीमित नहीं रखा है, बल्कि माटी शिल्पियों को हाट-बाजारों में निशुल्क स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। जिले के नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि शिल्पियों के लिए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे उन्हें अपना सामान बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें व्यवस्थित स्थान मिल सके।
शिल्पकार परिवारों की आजीविका को सहारा
माटी शिल्प से जुड़े कई परिवार पीढ़ियों से इसी पारंपरिक काम के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं। आधुनिक बाजार और मशीन से बने उत्पादों के बढ़ते चलन के बीच पारंपरिक शिल्पकारों के लिए अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में प्रशासन का यह फैसला सिर्फ त्योहारों के बाजार तक सीमित राहत नहीं, बल्कि पारंपरिक कला और स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
दीपावली के बाजार में मिल सकता है बड़ा फायदा
दीपावली के दौरान मिट्टी के दीयों और सजावटी सामान की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में शिल्पियों को यदि बाजार में निशुल्क और आसानी से उपलब्ध स्थान मिलता है, तो वे अधिक ग्राहकों तक अपने उत्पाद पहुंचा सकेंगे। इससे एक तरफ स्थानीय स्तर पर पारंपरिक मिट्टी के उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ शिल्पकारों को अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
नगरीय निकाय और पंचायतों को जिम्मेदारी
जिला प्रशासन ने सभी संबंधित नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि माटी शिल्पियों के लिए सुगम और निशुल्क व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अब स्थानीय प्रशासन के सामने चुनौती इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी, ताकि वास्तविक माटी शिल्पियों को समय पर स्थान मिले और त्योहारों के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
- माटी शिल्पियों से हाट-बाजार में कर नहीं लिया जाएगा।
- शिल्पियों को निशुल्क स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
- मिट्टी के दीये और मूर्तियों जैसे पारंपरिक उत्पादों को बाजार मिलेगा।
- छोटे शिल्पकार परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी।
- स्थानीय और पारंपरिक कला को प्रोत्साहन मिलेगा।
- नवरात्रि और दीपावली के सीजन में बिक्री का अवसर बढ़ेगा।
शिवपुरी जिला प्रशासन का यह फैसला पारंपरिक माटी शिल्पियों के लिए त्योहारों के मौसम में राहत और आर्थिक संबल देने वाला कदम है। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिले के अलग-अलग हाट-बाजारों में शिल्पियों के लिए निशुल्क स्थान की व्यवस्था कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है।



