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CBD बेलापुर TRF प्रोजेक्ट की रफ्तार थमी, महिलाओं के रोजगार पर चिंता

Pace of CBD Belapur TRF project stalls; concerns arise over women's wages and employment.

नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे: नवी मुंबई के CBD बेलापुर स्थित टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग फैसिलिटी (TRF) प्रोजेक्ट का काम फंडिंग से जुड़ी समस्याओं के कारण प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंडिंग एग्रीमेंट के नवीनीकरण में देरी के चलते परियोजना का संचालन धीमा पड़ गया है। इसका असर रीसाइक्लिंग गतिविधियों से जुड़ी महिलाओं के रोजगार और मेहनताने पर भी पड़ने की बात कही जा रही है। हालांकि, नवी मुंबई नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना को बंद नहीं किया जाएगा और इसे दोबारा सुचारु रूप से शुरू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण, कपड़ा कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की गई यह परियोजना पिछले कुछ समय में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है। ऐसे में इसके संचालन में आई रुकावट ने परियोजना की निरंतरता और इससे जुड़े लाभार्थियों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है CBD बेलापुर का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट?

केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय की टेक्सटाइल कमेटी, नवी मुंबई नगर निगम और एक सामाजिक संगठन के सहयोग से यह परियोजना पायलट आधार पर शुरू की गई थी। इसके तहत इस्तेमाल किए जा चुके और फेंके गए कपड़ों को एकत्रित किया जाता है। इसके बाद कपड़ों की छंटाई और प्रसंस्करण कर उनसे उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल कपड़ा कचरे का निपटान करना नहीं, बल्कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी है। परियोजना के माध्यम से महिलाओं को रीसाइक्लिंग से संबंधित कार्यों का प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए गए हैं।

41,500 किलो कपड़ा कचरे का प्रसंस्करण, 400 से अधिक उत्पाद तैयार

नगर निगम से पहले साझा की गई जानकारी के अनुसार, अगस्त 2025 से CBD बेलापुर के सेक्टर-1 स्थित केंद्र में लगभग 41,500 किलोग्राम टेक्सटाइल कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है। इस प्रक्रिया के माध्यम से 400 से अधिक उपयोगी उत्पाद तैयार किए गए हैं।

इस पहल से 11,500 से अधिक परिवारों के जुड़ने की जानकारी दी गई है। वहीं, 300 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। नगर निगम के पूर्व विवरण के मुताबिक, इनमें से 150 से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया था, जिनकी मासिक आय लगभग 9,000 से 15,000 रुपये के बीच बताई गई थी। इन आंकड़ों के मद्देनजर परियोजना में आई रुकावट केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे जुड़े परिवारों और महिलाओं की आजीविका के लिए भी महत्वपूर्ण है।

राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुका है सम्मान

TRF परियोजना को अपने नवाचार और पर्यावरणीय योगदान के लिए विभिन्न स्तरों पर सराहना मिली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस पहल ने ‘राजीव गांधी एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सेलेरेशन (PRAGATI) मिशन एवं प्रतियोगिता’ में ‘बेस्ट आइडिया/इनिशिएटिव’ श्रेणी में राज्य स्तर पर दूसरा पुरस्कार प्राप्त किया।

इसके अलावा, नवी मुंबई नगर निगम को ‘CITI टेक्सटाइल सस्टेनेबिलिटी अवार्ड 2026’ में नगर निगम श्रेणी के अंतर्गत बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेष सम्मान मिला। इन उपलब्धियों के बीच परियोजना का संचालन प्रभावित होना प्रशासन के लिए भी एक महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है।

SBI फाउंडेशन के साथ समझौते के नवीनीकरण में देरी

परियोजना का जमीनी स्तर पर संचालन करने वाले टीसर आर्टिसन ट्रस्ट को SBI फाउंडेशन से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत आर्थिक सहायता मिलती है। संगठन के अनुसार, SBI फाउंडेशन और टीसर आर्टिसन ट्रस्ट के बीच फंडिंग समझौते के नवीनीकरण में देरी के कारण वित्तीय कठिनाइयां पैदा हुई हैं। इसका असर परियोजना की नियमित गतिविधियों पर पड़ा है। कुछ महिलाओं ने समय पर भुगतान नहीं मिलने की शिकायत भी की थी, जिससे उनके मेहनताने को लेकर चिंता सामने आई।

हालांकि, संगठन के निदेशक प्रकाश सैनी ने परियोजना के स्थायी रूप से बंद होने की बात से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि समझौते के नवीनीकरण के लिए SBI फाउंडेशन के साथ बातचीत और फॉलो-अप जारी है। उनके अनुसार, फंड उपलब्ध होते ही काम दोबारा शुरू किया जाएगा। उन्होंने भुगतान को लेकर उठे सवालों पर भी अपनी ओर से स्पष्टीकरण दिया है।

नगर निगम का आश्वासन—‘प्रोजेक्ट बंद नहीं होगा’

TRF परियोजना की विभाग प्रमुख एवं उद्यान विभाग की उपनगर आयुक्त स्मिता काले ने संगठन की वित्तीय समस्याओं की पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना को किसी भी स्थिति में बंद नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय, नवी मुंबई नगर निगम और सामाजिक संगठन के सहयोग से यह पहल पायलट आधार पर संचालित की जा रही है। नगर निगम ने परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराई है और इसके आगे के संचालन को लेकर संबंधित संगठन के साथ लगातार बातचीत की जा रही है।

स्मिता काले ने उम्मीद जताई कि अनुबंध के नवीनीकरण से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान होगा और फिलहाल धीमी पड़ी गतिविधियों को फिर से सामान्य किया जा सकेगा।

अब फंडिंग समझौते के नवीनीकरण पर टिकी निगाहें

TRF परियोजना ने कपड़ा कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। लेकिन इसकी निरंतरता बाहरी फंडिंग और संबंधित संस्थाओं के बीच समझौते के नवीनीकरण पर निर्भर दिखाई दे रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फंडिंग का मामला कब सुलझेगा, महिलाओं के भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान कैसे होगा और परियोजना का नियमित संचालन कब बहाल होगा। नगर निगम और संबंधित संगठन के आश्वासन के बाद उम्मीद है कि जल्द ही इसका रास्ता निकलेगा। फिलहाल, इस परियोजना से जुड़े परिवारों और महिलाओं को कामकाज दोबारा शुरू होने का इंतजार है।

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