लोकनेते रामशेठ ठाकूर को ‘शरदरत्न जीवनगौरव पुरस्कार’ से सम्मानित
Public leader Ramsheth Thakur honored with 'Shardaratna Jeevan Gaurav Award', Sharad Pawar praised his life of service
पनवेल; सान्वी देशपांडे: संघर्ष से कर्तृत्व, कर्तृत्व से नेतृत्व और नेतृत्व से समाजसेवा का प्रेरणादायी सफर तय करने वाले माजी खासदार और लोकनेते रामशेठ ठाकूर को प्रतिष्ठित ‘शरदरत्न जीवनगौरव पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। समाजसेवा, शिक्षा, क्रीड़ा, कला, संस्कृति, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया। मुंबई के रवींद्र नाट्यमंदिर में आयोजित भव्य पुरस्कार वितरण समारोह में रयत शिक्षण संस्था के अध्यक्ष, माजी केंद्रीय मंत्री एवं सांसद शरद पवार के हाथों रामशेठ ठाकूर को यह सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर प्रतिभाताई पवार सहित महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों नागरिक उपस्थित रहे।
छह दशक के संघर्ष और समाजसेवा का गौरव
रामशेठ ठाकूर का सार्वजनिक जीवन छह दशक से अधिक समय के संघर्ष, कर्तृत्व और सामाजिक प्रतिबद्धता से जुड़ा रहा है। अत्यंत सामान्य परिस्थितियों से आगे बढ़ते हुए उन्होंने व्यवसाय, सामाजिक कार्य, शिक्षा और राजनीति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता सामान्य नागरिकों के साथ उनका सहज संवाद और आत्मीय संबंध माना जाता है। गरीब परिवारों की कठिनाइयों से लेकर विद्यार्थियों की शिक्षा, युवाओं के भविष्य और जरूरतमंद परिवारों की समस्याओं तक वे लगातार सहायता के लिए आगे आते रहे हैं।
दस हजार रुपये के काम से शुरू हुआ सफर
रामशेठ ठाकूर के जीवन का संघर्ष उनके शुरुआती व्यावसायिक सफर में भी दिखाई देता है। शिक्षक की नौकरी करते समय उन्हें सिडको का लगभग दस हजार रुपये का पहला काम मिला। इस काम को स्वीकार करने के लिए उन्हें घर के आभूषण तक गिरवी रखने पड़े और आर्थिक कठिनाइयों के बीच धन की व्यवस्था करनी पड़ी। हालांकि, उन्होंने संकट के सामने हार नहीं मानी। मेहनत, ईमानदारी और जिद के बल पर इस अवसर को सफलता में बदला और यहीं से उनके व्यावसायिक सफर की नींव पड़ी। दस हजार रुपये से शुरू हुई यह यात्रा आगे चलकर बड़े प्रकल्पों तक पहुंची।
भूमिपुत्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष
रामशेठ ठाकूर ने केवल व्यवसाय और राजनीति में ही नहीं, बल्कि भूमिपुत्रों के अधिकारों के आंदोलनों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। स्वर्गीय दि. बा. पाटील के नेतृत्व में जमीन, रोजगार, घर, साढ़े बारह प्रतिशत योजना और प्रकल्पग्रस्तों के अधिकारों के लिए हुए आंदोलनों में उन्होंने सहभागिता की। 1981 और 1984 के आंदोलनों के दौरान उनके संघर्ष और सक्रिय भूमिका ने उन्हें जनसामान्य के बीच मजबूत पहचान दिलाई। इसी जनविश्वास के आधार पर उन्होंने आगे चलकर लोकसभा तक का सफर तय किया और दो बार सांसद के रूप में कार्य किया।
राजनीति से दूरी, समाजसेवा को प्राथमिकता
राजनीतिक सफलता हासिल करने के बाद भी रामशेठ ठाकूर ने पद और सत्ता को अपने जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं माना। 52 वर्ष की उम्र में चुनावी राजनीति से दूर होकर समाजसेवा को अधिक समय देने का निर्णय उन्होंने लिया। इसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, क्रीड़ा, कला, संस्कृति, रोजगार और सामाजिक सहायता के क्षेत्र में उनका कार्य और व्यापक हुआ। उनका मानना रहा कि समाज ने व्यक्ति को जो दिया है, उसे समाज को वापस करना भी उसकी जिम्मेदारी है।
शिक्षा क्षेत्र में 135 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान
रयत शिक्षण संस्था से मिले संस्कारों और ‘कमाओ और सीखो’ की परंपरा को जीवन में आत्मसात करने वाले रामशेठ ठाकूर ने शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रयत शिक्षण संस्था की शालाओं, महाविद्यालयों और शैक्षणिक सुविधाओं के लिए उन्होंने 135 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता की है। आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी विद्यार्थी की शिक्षा बाधित न हो और ग्रामीण एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिले, इस उद्देश्य से उनका सहयोग लगातार जारी रहा है।
‘कमाओ और सीखो’ के संस्कारों से घड़े रामशेठ ठाकूर : शरद पवार
सम्मान समारोह में सांसद शरद पवार ने रामशेठ ठाकूर के जीवन और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कर्मवीर भाऊराव पाटील की ‘कमाओ और सीखो’ शिक्षा परंपरा से रामशेठ ठाकूर घड़े हैं। शरद पवार ने कहा कि आज रामशेठ ठाकूर की पहचान एक सफल उद्योजक के रूप में होती है, लेकिन उनकी मूल पहचान कर्मवीर भाऊराव पाटील की शिक्षा चळवळ से तैयार हुए विद्यार्थी की है। उन्होंने रयत शिक्षण संस्था को लगातार मजबूत सहयोग दिया है और संस्था की विकास यात्रा में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। शरद पवार ने यह भी कहा कि शिक्षा केवल व्यक्ति की प्रगति का माध्यम नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास का प्रभावी साधन है। कर्मवीर भाऊराव पाटील के विचारों से प्रेरणा लेकर रामशेठ ठाकूर ने शिक्षा, समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में जो कार्य किया, वह सामाजिक प्रतिबद्धता की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाता है।
समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश
श्री रामशेठ ठाकूर सामाजिक विकास मंडल के माध्यम से विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहायता, जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक मदद, स्वास्थ्य संबंधी उपक्रम, क्रीड़ा प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सहयोग दिया जाता रहा है। क्रीड़ापटुओं को अवसर, कलाकारों को मंच, विद्यार्थियों को आर्थिक आधार और जरूरतमंद परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के कारण उनके सामाजिक कार्य की व्यापक सराहना होती रही है।
समारोह में अनेक गणमान्य मौजूद
इस अवसर पर रयत शिक्षण संस्था के चेअरमन चंद्रकांत दळवी, वरिष्ठ पत्रकार मधुकर भावे, माजी नगराध्यक्ष जे.एम. म्हात्रे, वरिष्ठ नेता वाय.टी. देशमुख, भाजपा रायगढ़ जिलाध्यक्ष अविनाश कोळी, महापौर नितीन पाटील, कामगार नेता महेंद्र घरत, पनवेल महानगरपालिका के माजी सभागृह नेता एवं नगरसेवक परेश ठाकूर, वर्षा प्रशांत ठाकूर, अर्चना परेश ठाकूर, अमोघ ठाकूर, पूनम ठाकूर, रत्नप्रभा घरत सहित ठाकूर परिवार के सदस्य, माजी नगरसेवक अनिल भगत, माजी शहराध्यक्ष जयंत पगडे, शरद प्रतिभाशाली सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के अध्यक्ष राजारामबुवा शेलार, उपाध्यक्ष भावना घाणेकर तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य उपस्थित थे।
संघर्ष से कर्तृत्व, कर्तृत्व से नेतृत्व और नेतृत्व से समाजसेवा—रामशेठ ठाकूर का यह जीवनप्रवास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी संदेश देता है। ‘शरदरत्न जीवनगौरव पुरस्कार’ के माध्यम से उनके इसी लंबे सामाजिक और सेवाभावी योगदान का सम्मान किया गया।



