वन्यजीव संरक्षण के साथ प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा पर जोर
Emphasis on protecting natural habitats alongside wildlife conservation.

नई दिल्ली: वन्यजीव सप्ताह 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन और वन्यजीवों के संरक्षण को प्रकृति के संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक बताया है। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने नागरिकों से वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आपस में जुड़े प्राकृतिक आवास और वन्यजीव गलियारे बेहद महत्वपूर्ण हैं।प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों के सहयोग से वन्यजीव गलियारों की पहचान और उनके संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल जानवरों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन से जुड़ा विषय है। प्रधानमंत्री मोदी ने चीता परियोजना की सफलता का उल्लेख करते हुए पिछले एक दशक में भारत में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, गैंडा, नदी डॉल्फिन और हिम तेंदुए जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस के माध्यम से बड़ी जंगली बिल्लियों के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका को भी रेखांकित किया।
वन्यजीव सप्ताह 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश वन संरक्षण, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता की सुरक्षा के महत्व पर केंद्रित रहा। वन्यजीवों के संरक्षण के साथ उनके प्राकृतिक आवासों और गलियारों को सुरक्षित रखना पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया है कि जानवरों की सुरक्षित आवाजाही और पारिस्थितिक संतुलन के लिए आपस में जुड़े हुए आवास (Connected Habitats) और वन्यजीव गलियारे सबसे महत्वपूर्ण हैं। केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर इन गलियारों की पहचान करने और उन्हें संरक्षित करने के लिए लगातार काम कर रही है। इसके तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क के घास के मैदानों में बसाया गया, जो ऐतिहासिक आवासों को बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अमरेला स्पीशीज (जैसे एक सींग वाले गैंडे) के संरक्षण के साथ-साथ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, एशियाई शेर, गंगा डॉल्फिन और स्नो लेपर्ड के प्राकृतिक आवासों (घास के मैदान, आर्द्रभूमि और पहाड़ों) को सुरक्षित किया जा रहा है, आज भारत दुनिया की 70% से अधिक बाघ आबादी का घर बन चुका है। देश में संरक्षित क्षेत्रों (National Parks & Sanctuaries) की संख्या लगभग 750 से बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है। जलपक्षियों और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवासों यानी आर्द्रभूमियों (Wetlands) को बचाने के लिए भारत में रामसर स्थलों की संख्या 2014 के 26 से बढ़ाकर 99 कर दी गई है। प्राकृतिक आवासों को घना बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई ‘एक पेड़ माँ के नाम’ मुहिम के तहत करोड़ों पेड़ लगाए गए हैं, जिससे देश का ‘वेरी डेंस फॉरेस्ट कवर’ (बेहद घना वन क्षेत्र) तेजी से बढ़ा है।



