महानदी जल विवाद पर बड़ा कदम, अमित शाह की अध्यक्षता में साय-माझी की अहम बैठक
Major move on Mahanadi water dispute Sai and Majhi hold crucial meeting chaired by Amit Shah.

छत्तीसगढ़, रायपुर: छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में आज एक अहम पहल होने जा रही है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी शामिल होंगे। दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी समिति के सदस्य भी बैठक में मौजूद रहेंगे। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के भी बैठक में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। महानदी जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच विवाद एक दशक से अधिक समय से चला आ रहा है। विवाद मुख्य रूप से महानदी के जल के उपयोग, ऊपरी हिस्से में बनाए गए बैराजों और विशेष रूप से गैर-मानसूनी अवधि में ओडिशा की ओर पानी के प्रवाह से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा है।
इस विवाद के समाधान के प्रयासों को जुलाई 2026 में नई गति मिली थी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने 30 जुलाई को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ बैठक की थी। इसमें केंद्र सरकार, केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए थे। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, उस बैठक का उद्देश्य महानदी जल विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालना था। बैठक में संवाद, तकनीकी सहयोग और दोनों राज्यों के बीच समन्वय के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया था।
विवाद को सुलझाने के लिए केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में विस्तारित तकनीकी समिति का गठन किया गया है। केंद्र के मुताबिक, संयुक्त तकनीकी समिति की कई बैठकें हो चुकी हैं और कई तकनीकी मुद्दों पर सहमति भी बनी है। विस्तारित तकनीकी समिति की पहली बैठक 29 जुलाई 2026 को हुई थी। अब 1 अक्टूबर की बैठक में तकनीकी स्तर पर हुई प्रगति और दोनों राज्यों के बीच सहमति बनाए जाने की संभावनाओं पर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दिल्ली रवाना होने से पहले रायपुर विमानतल पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय जल आयोग को लिखित रूप से आश्वस्त किया है कि दोनों प्रदेशों के व्यापक हित में आयोग द्वारा लिया गया निर्णय दोनों राज्य सरकारों को मान्य होगा। सीएम साय के इस बयान से संकेत मिलता है कि दोनों राज्य तकनीकी स्तर पर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपनी सहमति का आधार तैयार कर रहे हैं।
महानदी जल विवाद को लेकर ओडिशा ने 2016 में छत्तीसगढ़ में महानदी के ऊपरी हिस्से में बनाए जा रहे बैराजों और जल संरचनाओं पर आपत्ति जताई थी। ओडिशा का कहना रहा है कि इन संरचनाओं से खासकर कम बारिश या गैर-मानसूनी अवधि में निचले हिस्से में पानी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। विवाद के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (Mahanadi Water Disputes Tribunal) का गठन किया था। इसका गठन ओडिशा की शिकायत और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद किया गया था। हाल के घटनाक्रम में दोनों राज्यों के बीच सीधे संवाद और तकनीकी स्तर पर सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। जुलाई की बैठक के बाद केंद्रीय जल आयोग की तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ी और अब गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक को इसी प्रक्रिया की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए महानदी के जल के उपयोग और प्रबंधन से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। हालांकि, बैठक से किसी अंतिम समझौते या निर्णय की घोषणा अभी पहले से नहीं की जा सकती।
महानदी दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण नदी है। इसके जल का इस्तेमाल कृषि, पेयजल, उद्योग और अन्य जरूरतों के लिए होता है। ऐसे में जल बंटवारे से जुड़े विवाद का समाधान दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है। आज की बैठक का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री एक ही मंच पर केंद्रीय नेतृत्व और तकनीकी अधिकारियों के साथ विवाद के समाधान पर चर्चा करेंगे। इससे अब तक हुई तकनीकी बातचीत को राजनीतिक स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
फिलहाल मुख्य फोकस इस बात पर है कि दोनों राज्य केंद्रीय जल आयोग और तकनीकी समितियों के स्तर पर हुई प्रगति के आधार पर किस तरह एक स्वीकार्य समाधान तक पहुंचते हैं।



