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मुंबई में मातंग समाज का आरक्षण में उपवर्गीकरण की मांग को लेकर मोर्चा

Protest in Mumbai demanding sub-categorization of reservation for the Matang community.

मुंबई: अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण में मातंग समाज के लिए अलग उपवर्गीकरण की मांग को लेकर मंगलवार को मुंबई में मातंग समाज की ओर से मोर्चा निकाला गया। आंदोलन के लिए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुंबई पहुंचे, जिसके चलते CSMT और आसपास के इलाकों में भीड़ देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ समाज के सभी घटकों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है। इसी को लेकर मातंग समाज के लिए SC आरक्षण के भीतर अलग उपवर्गीकरण करने की मांग की गई है। आंदोलनकारियों ने मांग की कि उपवर्गीकरण के जरिए मातंग समाज को शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए।

साथ ही सरकार से इस मांग पर तत्काल संज्ञान लेते हुए उपवर्गीकरण के कार्यान्वयन को लेकर ठोस निर्णय लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। मोर्चे के चलते दक्षिण मुंबई में यातायात भी प्रभावित हुआ। CSMT परिसर के कुछ मार्गों पर भीड़ और यातायात दबाव बढ़ने के बाद पुलिस ने यातायात प्रबंधन के लिए कुछ रास्तों को बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की।

  • मातंग समाज के नेताओं और प्रदर्शनकारियों (विधायक अमित गोरखे आदि के नेतृत्व में) की मांग है कि महाराष्ट्र में मौजूदा 13% अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण का वर्गीकरण किया जाए, ताकि समाज के वंचित और पिछड़े घटकों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में उनकी जनसंख्या के अनुपात में समान और न्यायसंगत अवसर मिल सकें।

  • आंदोलन के लिए आझाद मैदान के आसपास की अनुमति थी, लेकिन राज्यभर से आए हजारों प्रदर्शनकारी सीधे दक्षिण मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) स्टेशन, बीएमसी मुख्यालय और मेट्रो सिनेमा के पास मुख्य सड़कों पर उतर आए और सड़क पर बैठ गए। 

  • सड़क जाम होने के कारण दक्षिण मुंबई के कई प्रमुख मार्गों और चौराहों पर भारी यातायात बाधित हुआ। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने और यातायात को डायवर्ट करने के लिए कड़े कदम उठाए तथा कुछ स्थानों पर कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया।

अगस्त 2024 के सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद यह मांग और तेज हुई है, जिसमें अदालत ने फैसला सुनाया था कि राज्यों को अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है। 

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