समुद्री और ऊर्जा हितों की सुरक्षा पर मंथन करेंगे नौसेना कमांडर
Naval commanders to deliberate on safeguarding maritime and energy interests.

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना का वर्ष 2026 का दूसरा कमांडर्स सम्मेलन आज से नई दिल्ली में शुरू हो गया। तीन दिवसीय यह सम्मेलन 1 अक्टूबर तक चलेगा। सम्मेलन में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न ऑपरेशनल क्षेत्रों के कमांडर और क्षेत्रीय कमांडर हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान सैन्य और रणनीतिक स्तर पर भारतीय नौसेना की अभियानगत तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। बदलते समुद्री सुरक्षा वातावरण, राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए नौसेना की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श होगा। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत के ऊर्जा हितों और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सम्मेलन का प्रमुख विषय है। इस दौरान समुद्री क्षेत्र में निगरानी, सुरक्षा और संकट की स्थिति में नौसेना की भूमिका पर भी चर्चा होगी। सम्मेलन के पहले दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नौसेना कमांडरों को संबोधित करेंगे। वह राष्ट्रीय समुद्री हितों और भारतीय नौसेना से सरकार की अपेक्षाओं को लेकर अपना दृष्टिकोण और मार्गदर्शन साझा करेंगे।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और थल सेनाध्यक्ष भी नौसेना कमांडरों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। इन चर्चाओं का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और एकीकरण को और मजबूत करना है। सम्मेलन में आधुनिक सैन्य तकनीक पर भी विशेष जोर रहेगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI, बिग डेटा एनालिसिस, स्वायत्त और मानवरहित प्रणालियों तथा साइबर ऑपरेशंस जैसी तकनीकों के सैन्य इस्तेमाल पर चर्चा की जाएगी। नौसेना की भविष्य की क्षमता को मजबूत करने के लिए Jointness, Aatmanirbharta और Innovation को भी प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया जाएगा। सम्मेलन में ऑपरेशनल तैयारियों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण, मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता और भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं की भी समीक्षा की जाएगी।
तीन दिनों तक चलने वाला यह सम्मेलन भारतीय नौसेना की मौजूदा तैयारियों का आकलन करने के साथ-साथ बदलते समुद्री सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप भविष्य की रणनीति और क्षमता विकास की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।



