
MPSC छात्रों की मांगों पर सरकार से बातचीत, 2 अक्टूबर से धरना
Talks with government on demands of MPSC students, sit-in since October 2.
महाराष्ट्र, पुणे: महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग यानी MPSC की परीक्षा देने वाले छात्र अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर 2 अक्टूबर से पुणे में अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन शुरू करेंगे। यह आंदोलन 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन, पुणे के नवी पेठ स्थित एस. एम. जोशी पुल के पास शुरू होगा। छात्रों की मांगों और आंदोलन को लेकर विधायक रोहित पवार की मौजूदगी में छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इसी बैठक में आंदोलन की तारीख 2 अक्टूबर तय की गई। आंदोलन के लिए पुलिस की अनुमति देने पर भी सहमति बनी है। छात्रों की कई मांगें हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग MPSC के मौजूदा अध्यक्ष के इस्तीफे की है। छात्रों का कहना है कि उनकी लंबित मांगों पर सरकार और MPSC को जल्द फैसला लेना चाहिए। परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों की समस्याओं का समाधान करने की भी मांग की जा रही है।
इस बीच आने वाले दो दिनों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ MPSC छात्रों की बैठक होने की जानकारी दी गई है। इस बैठक में छात्रों की प्रमुख मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखी जाएंगी। इनमें MPSC अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग भी शामिल होगी। विधायक रोहित पवार ने छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन राजनीतिक आंदोलन नहीं है, बल्कि छात्रों की मांगों का समर्थन करने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि छात्रों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना जरूरी है।
कांग्रेस नेता डॉ. विश्वजीत कदम ने भी MPSC छात्रों की मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि MPSC छात्रों की अलग-अलग लंबित मांगों के लिए राहुल गांधी भी छात्रों के साथ खड़े रहेंगे और उनकी मांगों को समर्थन देंगे। छात्रों का यह धरना 2 अक्टूबर से शुरू होकर मांगें पूरी होने तक जारी रहने वाला अनिश्चितकालीन आंदोलन बताया गया है। अब सभी की नजरें मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक और सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर लिए जाने वाले फैसले पर रहेंगी।
- आयोजकों के अनुसार, आंदोलन से पहले मुख्यमंत्री/उपमुख्यमंत्री के साथ एक बैठक होने की संभावना है, ताकि छात्रों की मांगों पर सकारात्मक समाधान निकाला जा सके।
- छात्र नेताओं का कहना है कि वे सरकार से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं। यदि सरकार मांगों को स्वीकार कर लेती है, तो आंदोलन वापस लिया जा सकता है, अन्यथा यह अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।



