ऊना CSD कैंटीन में कथित लेनदेन और डेड स्टॉक बिक्री पर उठे सवाल,
Questions raised over alleged transactions and sale of dead stock at Una CSD canteen.

हिमाचल प्रदेश, ऊना: ऊना स्थित सीएसडी कैंटीन की कार्यप्रणाली को लेकर आर्मी इंटेलिजेंस से सेवानिवृत्त अधिकारी मनोज कुमार कौशल ने गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कैंटीन में डीलरों से कथित तौर पर लिए जाने वाले धन, सामान की गुणवत्ता, बिना मांग के सामान की आपूर्ति तथा डेड स्टॉक के नाम पर सामान की बिक्री से जुड़े मामलों की जांच करवाने की मांग उठाई है। मनोज कुमार कौशल ने इस संबंध में रक्षा मंत्रालय, जीओसी, पुलिस अधीक्षक ऊना और उपायुक्त ऊना को शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सीएसडी कैंटीन की व्यवस्था सीधे तौर पर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से जुड़ी है, इसलिए यहां सामान की खरीद, बिक्री, भुगतान और अन्य वित्तीय गतिविधियों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
डीलरों से करीब 50 हजार रुपये लिए जाने का आरोप
मनोज कौशल ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि ऊना स्थित सीएसडी कैंटीन में सामान की बिक्री और ऑर्डर से संबंधित प्रक्रिया के बदले डीलरों से करीब 50 हजार रुपये लिए जाने की बात सामने आई है। उनका दावा है कि इस संबंध में जालंधर से आए अधिकारियों से पूछताछ किए जाने पर कथित रूप से इसे सीएसआर फंड के तहत लिया जाना बताया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विभिन्न डीलरों से इस तरह की राशि ली जाती है तो उसका आधिकारिक रिकॉर्ड क्या है, पैसा किस खाते में जमा किया जाता है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाता है। उन्होंने संबंधित अवधि के रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और बैंक खातों की जांच करवाने की मांग की है। मनोज कौशल के अनुसार, करीब 30 डीलरों से कथित तौर पर इस तरह की राशि लिए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने जांच एजेंसियों से मांग की है कि संबंधित डीलरों और कैंटीन से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि वास्तव में कोई राशि ली गई थी या नहीं और यदि ली गई थी तो उसका लेखा-जोखा किस प्रकार रखा गया।
सामान की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल
पूर्व सैन्य अधिकारी ने कैंटीन में पहुंचने वाले सामान की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई बार डीलरों की ओर से ऐसा सामान कैंटीन में पहुंचाया जाता है जिसकी मांग नहीं होती या जिसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि यदि किसी ऐसे सामान की कैंटीन में आपूर्ति होती है जिसकी मांग कम है या जिसे उपभोक्ता स्वीकार नहीं करते, तो बाद में उसे डेड स्टॉक घोषित कर कम कीमत पर बेचने की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे मामलों में खरीद प्रक्रिया, सामान की मांग, आपूर्ति की मात्रा, स्टॉक रजिस्टर और बाद में की गई बिक्री का रिकॉर्ड जांचा जाए। मनोज कौशल ने डेड स्टॉक के नाम पर सामान की बिक्री को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी सामान को डेड स्टॉक घोषित किया जाता है तो उसके पीछे निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से यह भी जांच करने की मांग की है कि किन वस्तुओं को डेड स्टॉक घोषित किया गया, उनकी मूल खरीद कीमत क्या थी, उन्हें किस कीमत पर बेचा गया और बिक्री से प्राप्त राशि को किस खाते में जमा किया गया।
पहले भी शिकायत करने का दावा
मनोज कौशल का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर पहले दौलतपुर में भी शिकायत की थी, लेकिन उन्हें अपेक्षित या संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने मामले को उच्च स्तर पर उठाते हुए रक्षा मंत्रालय, जीओसी, एसपी ऊना और उपायुक्त ऊना को शिकायत भेजी है। उन्होंने मांग की है कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच पर जोर
पूर्व सैन्य अधिकारी ने जांच के दौरान कैंटीन से जुड़े वित्तीय और स्टॉक रिकॉर्ड की गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि कथित लेनदेन से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों का विवरण, डीलरों से संबंधित भुगतान रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, खरीद आदेश और डेड स्टॉक की बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के हितों से जुड़ी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता की संभावना को दूर करना आवश्यक है।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
हालांकि, इस पूरे मामले में लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता मनोज कुमार कौशल के दावों पर आधारित हैं। कथित तौर पर डीलरों से राशि लिए जाने, सीएसआर फंड के नाम पर लेनदेन तथा सामान की गुणवत्ता और डेड स्टॉक की बिक्री से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है। संबंधित सीएसडी कैंटीन, रक्षा विभाग अथवा जिन अधिकारियों पर आरोपों से संबंधित सवाल उठाए गए हैं, उनका पक्ष भी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मनोज कौशल ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराकर तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि सीएसडी कैंटीन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे और पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।



