Painkillers और Antibiotics पर CDSCO का अलर्ट, जानिए क्या है नई सलाह
Stop self-medicating with antibiotics; CDSCO issues important advisory.
नई दिल्ली: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दर्द निवारक दवाओं, विशेष रूप से नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) और एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध, बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है। दवा नियामक ने इन दवाओं के अनुचित इस्तेमाल से क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD), गुर्दे की कार्यक्षमता में कमी और अन्य रीनल जटिलताओं के जोखिम की ओर ध्यान दिलाया है। CDSCO की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित सर्कुलर 22 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं का इस्तेमाल न करें
CDSCO ने कहा है कि NSAIDs और एंटीबायोटिक्स जैसी दवाओं का इस्तेमाल केवल तब किया जाना चाहिए, जब चिकित्सकीय रूप से इसकी जरूरत हो। दवा की उचित खुराक, उचित अवधि और पंजीकृत चिकित्सक की निगरानी को महत्वपूर्ण बताया गया है।सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विभिन्न दवाएं उनके जोखिम और लागू प्रावधानों के आधार पर Drugs Rules, 1945 की अलग-अलग अनुसूचियों में आती हैं। अधिकांश NSAIDs Schedule H के अंतर्गत और अधिकांश एंटीबायोटिक्स Schedule H1 के अंतर्गत आते हैं, जिनकी बिक्री निर्धारित नियमों के अनुसार पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जानी चाहिए।
किडनी की बीमारी वाले मरीज रहें विशेष सावधान
CDSCO ने विशेष रूप से उन लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है जिन्हें पहले से किडनी की बीमारी है या जिनमें renal impairment का कोई अन्य जोखिम मौजूद है। ऐसे लोगों को NSAIDs लेने से पहले अपने डॉक्टर को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और अन्य दवाओं के बारे में जानकारी देनी चाहिए। नियामक ने डॉक्टरों से भी आग्रह किया है कि NSAIDs लिखते समय मरीज की उम्र, मौजूदा बीमारियों, साथ में चल रही दवाओं और किडनी से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखा जाए। जरूरत पड़ने पर सबसे कम प्रभावी खुराक और सबसे कम उपयुक्त अवधि अपनाने की सलाह दी गई है।
वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक से बचें
CDSCO ने आम जनता से एंटीबायोटिक्स की खुद से शुरुआत न करने की अपील की है। खास तौर पर ऐसी बीमारियों में, जहां एंटीबायोटिक की चिकित्सकीय आवश्यकता नहीं होती, इनका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। नियामक ने अधिकांश सामान्य और बिना जटिलता वाले वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक के स्व-उपयोग से बचने की सलाह दी है। डॉक्टर द्वारा एंटीबायोटिक लिखे जाने पर मरीजों को इसे निर्धारित तरीके से लेने, किसी दूसरे व्यक्ति के साथ दवा साझा न करने और बची हुई पुरानी दवाओं का दोबारा इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है।
गलत एंटीबायोटिक से बढ़ सकता है जोखिम
CDSCO ने स्वास्थ्य पेशेवरों को एंटीबायोटिक्स लिखते समय Antimicrobial Stewardship के सिद्धांतों का पालन करने को कहा है। संक्रमण की संभावित वजह, संक्रमण की जगह और गंभीरता तथा आवश्यकता होने पर संबंधित जांचों और स्थानीय दवा-संवेदनशीलता पैटर्न को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है। इसके अलावा अनावश्यक रूप से कई एंटीबायोटिक्स का संयोजन, गलत दवा का चयन, गलत खुराक और जरूरत से ज्यादा लंबे समय तक उपचार से बचने को कहा गया है।
फार्मासिस्ट और मेडिकल स्टोर संचालकों की भी जिम्मेदारी
CDSCO ने फार्मासिस्ट, रिटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर से Schedule H, H1 तथा अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री से संबंधित वैधानिक नियमों का पालन करने को कहा है। साथ ही ऐसे किसी भी व्यवहार से बचने की सलाह दी गई है जिससे एंटीबायोटिक्स या प्रिस्क्रिप्शन-आधारित NSAIDs के स्व-उपयोग को बढ़ावा मिले। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को भी दवाओं के विवेकपूर्ण इस्तेमाल, प्रिस्क्रिप्शन की समीक्षा, मरीजों की निगरानी और एंटीमाइक्रोबियल स्टुअर्डशिप को मजबूत करने की सलाह दी गई है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जागरूकता बढ़ाने के निर्देश
CDSCO ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रण प्राधिकरणों से कहा है कि डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, खुदरा विक्रेताओं और आम जनता के बीच NSAIDs और एंटीबायोटिक्स के अनुचित इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाए। दवा नियामक की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक और एंटीबायोटिक लेने की प्रवृत्ति से दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। CDSCO का जोर दवाओं पर रोक लगाने के बजाय उनके रैशनल, सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर है।
जनता के लिए सीधी सलाह
दर्द, बुखार या अन्य लक्षण लगातार बने रहें या दोबारा सामने आएं तो बार-बार खुद से दर्द निवारक या एंटीबायोटिक लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। खासकर किडनी की बीमारी, डिहाइड्रेशन या अन्य जोखिम वाली स्थिति में दवा लेने से पहले डॉक्टर को पूरी स्वास्थ्य जानकारी देना जरूरी है।



