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देशों की जरूरत के अनुसार बने ‘स्किल पासपोर्ट’ मुख्यमंत्री फडणवीस

Skill Passports' created according to the needs of countries Chief Minister Fadnavis.

महाराष्ट्र, मुंबई : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के युवाओं को वैश्विक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न देशों की कुशल मानवबल संबंधी जरूरतों का अध्ययन कर देशवार ‘स्किल पासपोर्ट’ तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों में जिन क्षेत्रों में कुशल कामगारों की मांग है, उसके अनुरूप महाराष्ट्र के युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और अन्य कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रमों को वर्तमान उद्योग और वैश्विक रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुसार लगातार अद्यतन किया जाए। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को केवल पारंपरिक रोजगार तक सीमित रखने के बजाय बदलती तकनीक और विभिन्न देशों में उभर रही कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया।

देशवार कौशल की मांग का तैयार हो डाटा

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में कुशल मानवबल की जरूरत अलग-अलग है। कहीं निर्माण क्षेत्र में प्रशिक्षित कामगारों की मांग है, तो कहीं स्वास्थ्य सेवा, इंजीनियरिंग, आईटी, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल, वेल्डिंग, मशीन संचालन, आतिथ्य और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। ऐसे में प्रत्येक देश की जरूरतों का व्यवस्थित अध्ययन कर ‘स्किल पासपोर्ट’ तैयार किया जाना चाहिए। इसमें संबंधित देश में उपलब्ध रोजगार के अवसर, आवश्यक तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल, भाषा की जरूरत, प्रमाणन तथा आवश्यक प्रशिक्षण जैसी जानकारियों को शामिल किया जा सकता है। इससे युवाओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी विशेष देश में रोजगार के लिए उन्हें किस प्रकार का प्रशिक्षण लेना होगा।

आईटीआई के पाठ्यक्रमों को बनाया जाए आधुनिक

मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) और अन्य कौशल विकास संस्थानों के पाठ्यक्रमों को समय-समय पर अपडेट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उद्योगों में तकनीक तेजी से बदल रही है, ऐसे में प्रशिक्षण संस्थानों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम भी इन बदलावों के अनुरूप होने चाहिए। प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीक, नई मशीनरी, डिजिटल कौशल और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली नवीन तकनीकों को शामिल करने पर जोर दिया गया है। इससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने और उन्हें उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।

वैश्विक रोजगार बाजार से जोड़े जाएंगे युवा

मुख्यमंत्री के निर्देशों का एक प्रमुख उद्देश्य महाराष्ट्र के युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार से जोड़ना है। देश के भीतर रोजगार के साथ-साथ विदेशों में उपलब्ध अवसरों की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने और उन्हें आवश्यक कौशल प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए प्रशिक्षण संस्थानों, उद्योगों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है। यदि किसी देश में किसी विशेष तकनीकी कौशल वाले कामगारों की मांग अधिक है, तो राज्य के प्रशिक्षण संस्थानों में उसी अनुरूप प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।

प्रशिक्षण और रोजगार के बीच मजबूत हो तालमेल

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कौशल विकास कार्यक्रमों का अंतिम उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए सक्षम बनाना होना चाहिए। इसके लिए प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के बीच समन्वय बढ़ाने की जरूरत है। ‘स्किल पासपोर्ट’ की अवधारणा के माध्यम से प्रशिक्षण को रोजगार की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है। इससे युवाओं को प्रशिक्षण लेने से पहले ही संभावित रोजगार क्षेत्र और आवश्यक कौशल की जानकारी मिल सकेगी।

भाषा और प्रमाणन पर भी दिया जा सकता है ध्यान

अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए केवल तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं होते। अलग-अलग देशों में काम करने के लिए संबंधित भाषा, व्यावसायिक मानकों और प्रमाणन की भी आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में देशवार ‘स्किल पासपोर्ट’ में इन आवश्यकताओं को भी शामिल किए जाने से युवाओं को विदेशों में रोजगार के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकता है। इस पहल के जरिए महाराष्ट्र में कौशल विकास की मौजूदा व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार से जोड़ने की दिशा में काम किया जा सकता है।

  • विभिन्न देशों की कुशल मानवबल की जरूरतों का अध्ययन किया जाएगा।
  • देशवार ‘स्किल पासपोर्ट’ तैयार करने के निर्देश।
  • आईटीआई और अन्य प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम होंगे अपडेट।
  • वैश्विक रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण देने पर जोर।
  • आधुनिक तकनीक और उद्योग की बदलती जरूरतों को प्रशिक्षण में शामिल करने का निर्देश।
  • कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर।
  • विदेशों में रोजगार के लिए आवश्यक कौशल, भाषा और प्रमाणन पर भी ध्यान देने की दिशा में प्रयास।
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