
डॉ. विठ्ठल वाघ को ‘भगवानरावजी लोमटे स्मृति राज्य पुरस्कार’
Bhagwanraoji Lomte Memorial State Award’ to Dr. Vitthal Wagh.
महाराष्ट्र ,बीड : महाराष्ट्र के बीड जिले के अंबाजोगाई में वरिष्ठ कवि, साहित्यकार एवं प्राचार्य डॉ. विठ्ठल वाघ को प्रतिष्ठित ‘भगवानरावजी लोमटे स्मृति राज्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यशवंतराव चव्हाण स्मृति समिति, अंबाजोगाई की ओर से प्रदान किया जाने वाला यह 14वां पुरस्कार है। पुरस्कार समारोह रविवार, 20 सितंबर 2026 को शाम 5 बजे आद्यकवि मुकुंदराज सभागृह, अंबाजोगाई में आयोजित किया गया। समारोह में प्रख्यात साहित्यकार एवं गांधीवादी विचारक प्राचार्य डॉ. विश्वास पाटील (शहादा) के हाथों डॉ. विठ्ठल वाघ को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बीड के वरिष्ठ पत्रकार अशोक देशमुख की प्रमुख उपस्थिति रही।
ग्रामीण जीवन और वऱ्हाडी बोली को साहित्य में दी पहचान
डॉ. विठ्ठल वाघ मराठी साहित्य में ग्रामीण जीवन के यथार्थ चित्रण के लिए जाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में मिट्टी की खुशबू, किसानों का परिश्रम, श्रमजीवी लोगों का सुख-दुःख और ग्रामीण समाज का जीवन प्रभावी रूप से दिखाई देता है। उन्होंने वऱ्हाडी बोली की मौलिक मिठास को भी अपने साहित्य और कविता के माध्यम से व्यापक स्तर पर पहुंचाया है। वे केवल कवि ही नहीं, बल्कि लेखक, उपन्यासकार, नाटककार, शोधकर्ता, कोशकार, चित्रकार और काव्यगायक के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। उनके साहित्यिक कार्यों ने मराठी ग्रामीण साहित्य को अलग पहचान और नया आयाम देने में योगदान दिया है।
कई चर्चित कृतियों के रचनाकार हैं डॉ. वाघ
डॉ. विठ्ठल वाघ के प्रमुख कविता संग्रहों में ‘कपाशीची चंद्रफुले’, ‘पाऊसपाणी’, ‘गावशिव’, ‘पंढरीच्या वाटेवर’, ‘काया मातीत मातीत’, ‘वैदर्भी’, ‘साय’, ‘वृषभसूक्त’, ‘मातीचा झरतो डोळा’ और ‘मायबाप’ शामिल हैं। इसके अलावा ‘डेबू’ और ‘डेबूजी’ उनकी चर्चित कृतियां हैं। उन्होंने फिल्मों के लिए गीत लेखन और पटकथा लेखन भी किया है। उनका नाटक ‘अंधारयात्रा’ भी चर्चित रहा है। अपनी प्रभावशाली और बुलंद आवाज में कविता प्रस्तुत करने की शैली के कारण वे साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय रहे हैं।
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी योगदान
डॉ. विठ्ठल वाघ ने इंदौर से एम.ए. मराठी की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद संत गाडगे बाबा विश्वविद्यालय, नागपुर से ‘पारंपरिक वऱ्हाडी म्हणींचा सर्वांगीण अभ्यास’ विषय पर पीएच.डी. की उपाधि हासिल की। उनका जन्म हिंगणी, तहसील तेल्हारा, जिला अकोला में हुआ। सेवानिवृत्ति के बाद वे पुणे में निवास करते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में कविता कार्यक्रमों के माध्यम से मराठी भाषा और साहित्य के प्रसार में भी योगदान दिया है।
25 हजार रुपये और सम्मान सामग्री पुरस्कार का हिस्सा
‘भगवानरावजी लोमटे स्मृति राज्य पुरस्कार’ के तहत 25 हजार रुपये नकद, स्मृति चिह्न, सम्मान पत्र, शॉल और पुष्पहार प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार स्वर्गीय भगवानरावजी लोमटे की स्मृति में साहित्य, संगीत, पत्रकारिता, शिक्षा, खेल, सिनेमा-नाटक तथा अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। इससे पहले यह पुरस्कार यशवंतराव गडाख पाटील, विजय कुवळेकर, पद्मश्री ना. धों. महानोर, रामदास फुटाणे, पं. नाथराव नेरळकर, विजय कोलते, मधुकर भावे, उल्हासदादा पवार, प्राचार्य रा. रं. बोराडे, पद्मश्री डॉ. यु. म. पठाण, प्रा. भास्कर चंदनशिव, पद्मश्री डॉ. सतीश आळेकर और डॉ. वासुदेव मुलाटे जैसी हस्तियों को दिया जा चुका है।
यशवंतराव चव्हाण स्मृति समिति के सचिव दगडू लोमटे ने डॉ. विठ्ठल वाघ के चयन की जानकारी दी थी। समिति के अनुसार, ग्रामीण जीवन, किसान और श्रमजीवी समाज के अनुभवों को साहित्य में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा वऱ्हाडी भाषा के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया गया।



