
पुणे फेस्टिव्हलचा दिमाखदार आगाज, मोहन जोशींना जीवन गौरव पुरस्कार
Grand inauguration of the 38th Pune Festival Mohan Joshi receives a major honor.
महाराष्ट्र, पुणे: पुणे के श्री गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच, स्वारगेट में आयोजित पुणे फेस्टिवल के 38वें संस्करण का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत के विकास की यात्रा में आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। आधुनिक बुनियादी ढांचे, तकनीक और आर्थिक प्रगति के साथ देश की सांस्कृतिक विरासत, भाषा, कला, परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, संस्कृति मंत्री आशीष शेलार, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, सांसद हेमा मालिनी, सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
मोहन जोशी को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’
समारोह का एक प्रमुख आकर्षण वरिष्ठ अभिनेता मोहन जोशी को संस्थापक सुरेश कलमाडी पुणे फेस्टिवल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया जाना रहा। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें यह सम्मान भारतीय सिनेमा और प्रदर्शन कला में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया। अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास को केवल आर्थिक वृद्धि, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर या तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं किया जा सकता। विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिकता और तकनीकी प्रगति के साथ भारत को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक शहरों का निर्माण करते समय उनके सांस्कृतिक चरित्र को बनाए रखना और नई तकनीक को अपनाते हुए परंपराओं का सम्मान करना आवश्यक है।
पुणे को बताया संस्कृति और ज्ञान का प्रमुख केंद्र
उपराष्ट्रपति ने पुणे के ऐतिहासिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुणे शिक्षा, उद्योग, खेल, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल निर्माण, पर्यटन और बागवानी सहित कई क्षेत्रों का प्रमुख केंद्र बन चुका है और इसके साथ उसने अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी कायम रखा है। उन्होंने पुणे फेस्टिवल को पुणे की ‘सिटी ऑफ फेस्टिवल्स’ की पहचान मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया और इसके संस्थापक दिवंगत सुरेश कलमाडी के योगदान को याद किया। पुणे फेस्टिवल में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी देखने को मिली। उपराष्ट्रपति ने बताया कि करीब 20 देशों के विद्यार्थियों ने पारंपरिक गणेश पूजा कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने इसे भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का सुंदर उदाहरण बताया। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न देशों और संस्कृतियों के बीच संवाद तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है।
महिलाओं और युवा कलाकारों को मंच
उपराष्ट्रपति ने पुणे फेस्टिवल में युवा और उभरते कलाकारों को दिए जा रहे अवसरों की भी सराहना की। ‘उगवते तारे’, ‘इंद्रधनुष’ और महिला महोत्सव जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिल रहा है। उन्होंने विशेष रूप से महिला महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच महिलाओं को अपनी कला और रचनात्मकता प्रदर्शित करने का अवसर देते हैं और उनके सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि पर्यटन आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है और महाराष्ट्र में सांस्कृतिक पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुणे फेस्टिवल में भविष्य में और विस्तार की क्षमता है और इसे एक बड़े वैश्विक सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में विकसित किया जा सकता है। राज्यपाल ने पुणे की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक भूमिका का उल्लेख करते हुए इसे ज्ञान, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, उद्योग और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बताया
पुणे फेस्टिवल की समृद्ध परंपरा
पुणे फेस्टिवल पिछले कई वर्षों से कला, संगीत, नृत्य, साहित्य, पर्यटन और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों को एक मंच प्रदान करता रहा है। महोत्सव के माध्यम से देश-विदेश के कलाकारों और दर्शकों के बीच सांस्कृतिक संवाद का अवसर मिलता है। उपराष्ट्रपति ने महोत्सव के निरंतर आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी और कहा कि ऐसे आयोजन भारत की विविध और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘विकसित भारत’ में संस्कृति की अहम भूमिका
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘विकसित भारत’ की अवधारणा केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसमें समाज के सभी वर्गों की भागीदारी, समान अवसर और देश की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव भी शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुणे फेस्टिवल जैसे सांस्कृतिक आयोजन स्थानीय कलाकारों, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अवसर देने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी मजबूत करते हैं।
पुणे फेस्टिवल के 38वें संस्करण का उद्घाटन कला, संस्कृति और परंपरा के भव्य संगम के रूप में हुआ। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने जहां आधुनिक विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का संदेश दिया, वहीं वरिष्ठ अभिनेता मोहन जोशी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की भागीदारी और युवा एवं महिला कलाकारों को मंच मिलने से इस महोत्सव का सांस्कृतिक दायरा और व्यापक हुआ है।



