Trending

पुरुषोत्तम करंडक का पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न

Purushottam Trophy award distribution ceremony concluded.

महाराष्ट्र,पुणे: कला के क्षेत्र में आगे बढ़ते समय शिक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। युवाओं को विभिन्न कौशल सीखने के साथ यह अंतर भी समझना चाहिए कि उन्हें क्या पसंद है और क्या वास्तव में आता है। यह सलाह वरिष्ठ अभिनेता एवं भारतीय नाट्य परिषद के नियामक मंडल के अध्यक्ष प्रशांत दामले ने युवाओं को दी। मौका था महाराष्ट्रीय कलोपासक संस्था द्वारा आयोजित 61वीं पुरुषोत्तम करंडक अंतरमहाविद्यालयीन एकांकिका प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह का। भरत नाट्य मंदिर में आयोजित समारोह में प्रशांत दामले के हाथों विजेता टीमों को पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्कार ग्रहण करते समय विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ ‘आवाज किसकी’, ‘हमारा नाटक हम ही मंचित करेंगे’, ‘हमारा नाटक हम ही लिखेंगे’ और ‘पुंडलिक वरदे हरी विठ्ठल’ जैसे नारे लगाकर जमकर जश्न मनाया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रतियोगिता में पुरुषोत्तम करंडक जीतने वाली भारती विद्यापीठ के कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स की एकांकिका ‘लाजाळू’ के मंचन से हुई। विजेता प्रस्तुति ने दर्शकों और उपस्थित कलाकारों की खूब सराहना बटोरी।

प्रशांत दामले ने साझा किया अपना अनुभव

विद्यार्थियों से भावनात्मक संवाद करते हुए प्रशांत दामले ने कहा कि कोई भी व्यक्ति पूरी तरह परिपूर्ण नहीं होता। इसलिए एक-दूसरे की मदद करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने अपने कलाप्रवास का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने वर्ष 1978 से 1982 तक मॉब आर्टिस्ट के रूप में काम किया। यह दौर उनके लिए काफी सीखने वाला रहा और इसी दौरान उन्हें दर्शकों की वास्तविक प्रतिक्रियाओं को करीब से समझने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि ‘टुरटूर’ नाटक के माध्यम से उन्हें रंगदेवता का आशीर्वाद मिला और उनके अभिनय सफर को नई दिशा मिली। इस दौरान उन्हें अच्छे निर्माता और सहकलाकारों का साथ मिला।

दामले ने विद्यार्थियों से कहा कि किसी भी परिस्थिति में चिकाटी, प्रतियोगिता की समझ और एकाग्रता के साथ काम करना जरूरी है। मंच पर कलाकार को अपनी आवाज स्वयं स्पष्ट रूप से सुनाई देनी चाहिए। संवादों का पाठांतर पूरी तरह पक्का होना चाहिए और बोले गए प्रत्येक वाक्य का अंतिम अक्षर भी दर्शकों तक स्पष्ट रूप से पहुंचना चाहिए।

परीक्षकों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा को सराहा

प्रतियोगिता के परीक्षकों प्रसाद शिरगावकर, अमृत सामक और निपुण धर्माधिकारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने प्रतियोगिता में प्रस्तुत एकांकिकाओं में विषयों और विचारों की विविधता, तकनीकी कौशल, विद्यार्थी लेखकों की बढ़ती संख्या और परिपक्व प्रस्तुति की सराहना की। प्रसाद शिरगावकर ने कहा कि यह मंच विद्यार्थियों के भीतर मौजूद कलाकार को निखारने का महत्वपूर्ण माध्यम है। वहीं निपुण धर्माधिकारी ने विद्यार्थियों से कहा कि कलोपासक संस्था के इस उपक्रम को केवल एक प्रतियोगिता के रूप में न लें, बल्कि इसे अपना स्वयं का मंच समझें। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भावना रखने की सलाह दी कि आज के प्रतियोगी ही कल उनके सहकर्मी बनने वाले हैं।

समारोह के दौरान महाराष्ट्र साहित्य परिषद के अध्यक्ष योगेश सोमण तथा पुरुषोत्तम करंडक प्रतियोगिता में विद्यार्थी लेखकों द्वारा लिखी गई संहिताओं का अध्ययन कर उन पर शोध प्रबंध प्रस्तुत करने वाले डॉ. विजयकुमार जोशी का विशेष सत्कार भी किया गया।

कार्यक्रम में महाराष्ट्रीय कलोपासक संस्था के अध्यक्ष अनंत निघोजकर, उपाध्यक्ष डॉ. सुहास जोशी, प्राथमिक फेरी के परीक्षक प्रसाद शिरगावकर और अमृत सामक, अंतिम फेरी के परीक्षक निपुण धर्माधिकारी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कलोपासक के चिटणीस एडवोकेट राजेंद्र ठाकुरदेसाई ने किया

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker