
चूरू निकाय चुनाव में BJP-कांग्रेस आमने-सामने
BJP-Congress face-to-face in Churu Nikaya elections.
राजस्थान,चूरू : चूरू जिले की नगर परिषद और विभिन्न नगर पालिकाओं के निकाय चुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद स्थानीय राजनीति में नई तस्वीर सामने आई है। जिले के अलग-अलग निकायों में कहीं भाजपा ने बढ़त बनाई है तो कहीं कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया है। वहीं, कुछ निकायों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है।चुनाव परिणाम सामने आने के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रदर्शन को महत्वपूर्ण बताया है। जिन निकायों में भाजपा को बढ़त मिली है, वहां पार्टी बोर्ड गठन की रणनीति में जुटी है। वहीं कांग्रेस भी अपने पक्ष में आए परिणामों को स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत होने का संकेत बता रही है।
कुछ नगर निकायों में स्थिति ऐसी बनी है कि भाजपा या कांग्रेस में से किसी एक के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। ऐसे में निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। दोनों दलों की नजर अब इन पार्षदों के समर्थन पर है। निकाय चुनाव के परिणामों का असर केवल बोर्ड गठन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सड़क, सफाई, पेयजल, बिजली, विकास कार्य और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर नई परिषद से लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। चूरू जिले में अलग-अलग निकायों में अलग-अलग राजनीतिक तस्वीर सामने आने से यह चुनाव परिणाम स्थानीय राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा को दर्शाते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि किन निकायों में किस दल का बोर्ड बनता है और निर्दलीय पार्षद किसका समर्थन करते हैं।
- निर्दलीयों के हाथ में सत्ता की चाबी: बीजेपी के पास 30 सीटें हैं और बहुमत के लिए 31 का आंकड़ा चाहिए। ऐसे में अब चूरू नगर परिषद में सभापति बनाने के लिए 6 निर्दलीय पार्षद बेहद निर्णायक भूमिका में आ गए हैं।
- बाड़ाबंदी की राजनीति: नतीजों और मतदान के तुरंत बाद से ही किसी भी प्रकार की सेंधमारी या क्रॉस-वोटिंग को रोकने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने-अपने जीते हुए व संभावित प्रत्याशियों को सुरक्षित/अज्ञात स्थानों पर (बाड़ाबंदी में) भेज दिया है।
- चूरू जिले की अन्य निकाय स्थिति: चूरू जिले की कुल 11 नगर निकायों में से 7 निकायों में भाजपा का दबदबा साफ़ नजर आ रहा है, जबकि 3 निकायों में कांग्रेस को बहुमत मिला है। राजलदेसर जैसी निकाय में भाजपा और कांग्रेस दोनों 14-14 सीटों पर आकर बराबरी पर रुक गई हैं।
आने वाले दिनों में बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों के फैसले कई निकायों में स्थानीय सत्ता की दिशा तय कर सकते हैं।



