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भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में नया अध्याय, व्यापार पांच गुना बढ़ाने का लक्ष्य

A new chapter in India-Uzbekistan relations; goal to increase trade fivefold.

नई दिल्ली: भारत और उज्बेकिस्तान ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करते हुए खनन, आयुर्वेद, पर्यटन, आर्थिक एवं वित्तीय संवाद, उच्च शिक्षा, पर्यावरण और संस्कृति समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौतों और सहमति-पत्रों का आदान-प्रदान किया। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। यह मौजूदा व्यापार स्तर की तुलना में करीब पांच गुना अधिक है। उज्बेकिस्तान यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों के पूरे आयाम की समीक्षा की और सहयोग के नए क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की।

व्यापार से लेकर रक्षा और डिजिटल क्षेत्र तक सहयोग

बैठक के दौरान व्यापार एवं निवेश, बुनियादी ढांचा, दुर्लभ खनिज, खनन, रक्षा एवं सुरक्षा, नवाचार, कृषि, औषधि, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध केवल पूंजी और निवेश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें शहरों और राज्यों के स्तर तक भी विस्तारित किया जाएगा।

आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति पर कायम हैं। दोनों देशों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

हिंदी और खेलों को बढ़ावा देने पर जोर

भारत और उज्बेकिस्तान ने खेलों तथा हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए भी मिलकर काम करने पर सहमति जताई। इस दिशा में स्कॉलरशिप की घोषणा भी की गई है। शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों के युवाओं के बीच संपर्क और सांस्कृतिक समझ मजबूत होने की उम्मीद है।

संबंध अब ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ तक

भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) तक ले जाने का फैसला किया है। यह दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है। इस दौरान खनन, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन और आयुर्वेद समेत विभिन्न क्षेत्रों में कई समझौते और सहमति-पत्रों का आदान-प्रदान हुआ। उज्बेकिस्तान में स्थित महत्वपूर्ण बौद्ध विरासत स्थलों फयाज़ टेपा और कारा टेपा के संरक्षण को लेकर भी सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।

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प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मानों में शामिल ‘ओली दराजली दोस्तलिक ऑर्डर’ (Order of High-Level Friendship) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और सहयोग को नई दिशा देने में प्रधानमंत्री मोदी के महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया। यह सम्मान उज्बेकिस्तान की ओर से विदेशी नेताओं और विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को दिया जाने वाला सर्वोच्च स्तर का सम्मान माना जाता है और दोनों देशों के बीच गहरी होती मित्रता का प्रतीक है।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच हुए समझौतों से आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा, संस्कृति और रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। 2030 तक 5 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप भी तैयार किया है।

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